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बांग्लादेशी और रोहिंग्या दिल्ली विधानसभा चुनाव में निर्णयक  साबित तो नही होंगे!


गोगुन्दा(कांतिलाल मांडोत ) !  भाग्य में क्या लिखा है यह कोई नही जानता है।दिल्ली विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज गई है।इस बार भाजपा और आप पार्टी से सीधा मुकाबला है।घुसपैठियों के वोट का भय हर पार्टी को दिखाई दे रहा है।बंगलादेशी और रोहिंग्या दिल्ली विधानसभा की बाजी न बिगाड़ दे?उसके लिए सचेत रहने की जरूरत है।क्योंकि भाजपा के प्रत्याशी रमेश बिधूड़ी ने दावा किया है कि बंगलादेशी हर जगह बसते जा रहे है आप उनको शरण दे रही है।यह सही बात है कि खासकर दिल्ली विधानसभा पर घुसपैठियों पर आप की नजर है।केजरीवाल ने इन घुसपैठियों के लिए कुछ भी मदद नही की है।यह बात अलग है कि केजरीवाल की रहमोकरम बांग्लादेशी और रोहिंग्या पर है।दिल्ली के एलजी ने अवैध  बंगलादेशी पर कार्यवाई का आदेश भी दिया था।भाजपा दिल्ली चुनाव में इसे बडा मुद्दा बनाकर भले ही पेश करे,लेकिन विधानसभा चुनाव में भाजपा को नुकसान का सामना न करना पड़े।उसके लिए बारिकी से नजर रखनी है।क्योकि केजरीवाल की तुष्टिकरण की नीति और घुसपैठियों को बचाने के आरोप भाजपा कई बार लगा चुकी है।जाफराबाद,उत्तमनगर रंगपुरी साउथ कैम्प्स सीलमपुर और सेंटर दिल्ली में अवैध बंगलादेशी रह रहे है।इनकी हालत खस्ताहाल है।दिल्ली सरकार की तरफ से कोई मदद इनको नही मिलती है।लेकिन केजरीवाल वोट हासिल करने के लिए उनको  चुनाव के बाद मदद का भरोसा देने का वादा भी किया है।घुसपैठियों से इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव की बाजी बिगड़ सकती है।सरकार के पास 40 हजार रोहिंग्या की सूची है जो अवैध रूप से रह रहे है,लेंकिन एक सर्वे के अनुसार बांग्लादेशी और रोहिंग्या की दो करोड़ की आबादी का अनुमान लगाया जा रहा है।इतनी भारी जनसंख्या अगर वास्तविक है तो दिल्ली विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की बल्लेबले है।घुसपैठियों को केजरीवाल स्वीकार कर रहे है।जबकि भाजपा को आप यह कहकर घेर रही है कि उनकी नाकामियों के कारण अप्रवासी दिल्ली में घुस आए है।दिल्ली विधानसभा चुनाव में बंगलादेशी और रोहिंग्या  की निर्णायक भूमिका रहती है तो केजरीवाल को सीधा फायदा हो सकता है।क्योंकि भाजपा घुसपैठियों को शरण नही दे रही है।क्योंकि केंद्र सरकार घुसपैठियों के खिलाफ है।इस बार केजरीवाल और भाजपा की सीधी टक्कर है तो कांग्रेस की राह आसान नही है।केजरीवाल और भाजपा पर कांग्रेस सीधा हमला बोल रही है।कांग्रेस आरएसएस और अडानी पर भाजपा को घेर रही है।जबकि केजरीवाल की सियासी बिसात झुगियो पर है।केजरीवाल अवैध घुसपैठ के खिलाफ नही है।केजरीवाल को मुसलमानो के वोट चाहिए।लेकिन हिन्दू वोट के लिए केजरीवाल सॉफ्टटार्गेट की रणनीति अपना रहे है।केजरीवाल को भाजपा इस बार भी हल्के में नही ले।क्योकि जिस तरह केजरीवाल को जूठे वादे पर घेर रही है।उससे मतदाताओं को कोई फर्क नही पड़ता है।इस समय कौन क्या दे रहा है।उस पर सभी का ध्यान रहता है।रेवड़ियां बंट रही है उसके लिए कतार लगाने वाले भी कम नही है।इसलिए किसी को हल्के में न लिया जाए ।भाजपा दलित वोटरों पर फोकस कर रही है।केजरीवाल की इस बार दिल्ली विधानसभा में राह आसान नही है।फिर भी विपक्ष को सख्त रहने की जरूरत है।आप के कार्यकर्ता फ्री बिजली पानी और इलाज की बात कर आकर्षित करने झुगियो का दौरा कर रहे है।इस बात त्रिकोणीय मुकाबले में दिल्ल पर किसका राज चलता है।यह समय की बलिहारि है।
               *कांतिलाल मांडोत*

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