



मूसलाधार वर्षा के बीच संघ शिक्षा वर्ग का भव्य समापन,
प्रकट समारोह में दिखा अद्भुत उत्साह, हुआ समरसता भोज
निंबाराम ने हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने पर हल्दीघाटी विजय समारोह के विशाल कार्यक्रम में सहभागिता का किया आह्वान
हल्दीघाटी विजय समारोह में सरसंघचालक मोहन भागवत का होगा मार्गदर्शन
फतहनगर, 2 जून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग (महाविद्यालय विद्यार्थी) का समापन समारोह मंगलवार को भव्य, प्रेरणादायी एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।
समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राजस्थान के क्षेत्र प्रचारक निंबाराम मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता पूज्या आई मां कंकू केसर ने की।
अपने उद्बोधन में निंबाराम ने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग केवल प्रशिक्षण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए समर्पित व्यक्तित्वों के निर्माण की कार्यशाला है। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए चरित्रवान, अनुशासित एवं संगठित व्यक्तियों की आवश्यकता है और संघ इसी दिशा में सतत कार्य कर रहा है।
उन्होंने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में संघ के प्रसिद्ध गीत “आंधी मिले, तूफान मिले, चाहे जितने व्यवधान मिले” का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वयंसेवकों का जीवन परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए भी अपने ध्येय के प्रति अडिग रहने का प्रतीक है। आज समापन समारोह में हो रही तेज वर्षा के बीच स्वयंसेवकों एवं समाजजनों की उपस्थिति इस गीत की भावना को साकार करती हुई दिखाई दी।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रकार्य में आने वाली कठिनाइयाँ स्वयंसेवकों के उत्साह को कम नहीं कर सकतीं, बल्कि उन्हें और अधिक दृढ़ बनाती हैं। भारत की शक्ति उसकी सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता एवं पारिवारिक मूल्यों में निहित है। संघ का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को जोड़ते हुए एक संगठित, सक्षम एवं आत्मविश्वासी राष्ट्र का निर्माण करना है। वर्ग में प्राप्त संस्कारों को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उतारना ही प्रशिक्षण की वास्तविक सार्थकता है।
निंबाराम ने मेवाड़ की गौरवशाली परंपरा का स्मरण करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और अदम्य साहस का प्रेरक आदर्श है। इस वर्ष हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं, जो सम्पूर्ण राष्ट्र और विशेष रूप से मेवाड़ के लिए गौरव का विषय है। इस ऐतिहासिक अवसर पर मेवाड़ में एक विशाल एवं भव्य कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। उन्होंने उपस्थित सभी स्वयंसेवकों, अभिभावकों एवं समाजजनों से इस ऐतिहासिक आयोजन में अधिकाधिक संख्या में सहभागिता करने का आह्वान करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने और राष्ट्रभाव को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।
अध्यक्षीय उद्बोधन पूज्या आई मां कंकू केसर ने कहा कि राष्ट्र और समाज के लिए कार्य करने वाले युवाओं का निर्माण ही किसी भी देश की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने स्वयंसेवकों को सदैव सेवा, संस्कार और समर्पण के मार्ग पर अग्रसर रहने का आशीर्वाद प्रदान किया तथा समाज के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माँ की वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात वर्गार्थियों द्वारा दंड, योग, समता, नियुद्ध, व्यायाम योग तथा अन्य शारीरिक कार्यक्रमों का प्रभावी प्रदर्शन किया गया। स्वयंसेवकों की एकरूपता, अनुशासन, दक्षता एवं आत्मविश्वास ने उपस्थित नागरिकों को अत्यंत प्रभावित किया। वर्ग के दौरान प्राप्त प्रशिक्षण की झलक इन प्रस्तुतियों में स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
तेज बारिश के बीच स्वयंसेवकों ने किया प्रदर्शन:
समापन समारोह के दौरान हुई मूसलाधार वर्षा भी स्वयंसेवकों एवं समाजजनों के उत्साह को डिगा नहीं सकी। तेज बारिश के बावजूद सभी स्वयंसेवक पूरे अनुशासन एवं एकाग्रता के साथ कार्यक्रम स्थल पर डटे रहे तथा बड़ी संख्या में उपस्थित समाजजनों ने भी अंत तक कार्यक्रम में सहभागिता निभाकर राष्ट्रकार्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया।
स्वावलंबन एवं पर्यावरण अनुकूल दिनचर्या:
शिक्षार्थियों ने स्वावलंबन एवं सामूहिकता की भावना के साथ निवास, भोजन, स्वच्छता एवं अन्य व्यवस्थाओं का संचालन स्वयं करते हुए आत्मनिर्भरता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। वर्ग में सिंगल यूज प्लास्टिक का निषेध रहा और जल संरक्षण आधारित दिनचर्या रही। शिक्षार्थी तय सत्र में 05 मिनट पहले पहुंचने का स्वभाव रहा।
संविधान व पाथेय कण प्रदर्शनी:
संविधान के चित्रों एवं संबंधित अध्यायों के साथ संदेश देती संविधान की प्रदर्शनी लगाई गई। साथ ही पिछले 30 वर्षों के पाथेय कण विशेषांक को स्वाध्याय के लिए शिक्षार्थियों को उपलब्ध करवाये गये।
98 शिक्षार्थी, 25 शिक्षक, 29 प्रबंधक:
17 मई दोपहर से प्रारंभ होकर 15 दिवसीय यह वर्ग 2 जून प्रातः दीक्षांत समारोह के पश्चात पूर्ण हुआ। इस वर्ग में चित्तौड़ प्रांत के 15 प्रशासनिक एवं संघ दृष्टि से 27 जिलों के 83 स्थानों से 98 शिक्षार्थी देश सेवा की साधना को तीव्र करने के लिए उपस्थित हुए हैं। सभी 98 शिक्षार्थियों ने प्रशिक्षण पूर्ण किया। इन शिक्षार्थियों में 17 वर्ष से 28 वर्ष की आयु वर्ग के महाविद्यालयीन विद्यार्थी के प्रशिक्षणार्थी सम्मिलित हैं। संघ कार्य की दृष्टि से इनमें 44 कार्यकर्ता शाखा स्तर तथा 54 स्वयंसेवक प्रवासी कार्यकर्ता के रूप में अपने अपने क्षेत्र में कार्यरत है। इन शिक्षार्थियों के सुचारू एवं सघन प्रशिक्षण हेतु अपने अपने विषय में 25 निपुण शिक्षक तथा इनकी सभी सामान्य आवश्यकताओं के व्यवस्थित प्रबंधन के लिए 29 प्रबंधक दिन रात लगे हुए थे।
वर्गाधिकारी द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में बताया गया कि 15 दिवसीय इस शिक्षा वर्ग में विभिन्न नगरों एवं ग्रामों से आए स्वयंसेवकों ने सहभागिता की। वर्ग के दौरान शारीरिक प्रशिक्षण, बौद्धिक सत्र, योग, गीत, समूह चर्चा, सेवा गतिविधियाँ, सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, ग्राम विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं राष्ट्रीय विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया गया। संघ शिक्षा वर्ग फतहनगर नगर में स्थित विद्या निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित हुआ।
समापन अवसर पर स्वयंसेवकों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं सांस्कृतिक गौरव की रक्षा हेतु निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। संघ प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के प्रबुद्धजन, शिक्षाविद्, चिकित्सक, उद्योगपति, सामाजिक कार्यकर्ता, अभिभावक एवं स्वयंसेवक उपस्थित रहे। मूसलाधार वर्षा के बीच भी पूरे परिसर में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, संगठन शक्ति एवं समर्पण का अद्भुत वातावरण देखने को मिला, जिसने उपस्थित सभी नागरिकों के मन में राष्ट्रसेवा के प्रति नई प्रेरणा का संचार किया।








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