गाय को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा देने की उठी माँग
भीलवाड़ा, (जय प्रकाश शर्मा)!बनेड़ा आज के दौर में बच्चों के भविष्य को लेकर संस्कार सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभरे हैं। बचपन से ही भक्ति और नैतिकता के संस्कार केवल माता-पिता ही प्रदान कर सकते हैं। बच्चे अक्सर उन बातों को नहीं समझते जो उन्हें कही जाती हैं, बल्कि वे उस व्यवहार को अपनाते हैं जो वे अपने बड़ों को करते हुए देखते हैं। यदि घर के बड़े अच्छाई के रास्ते पर चलते हैं, तो बच्चे उन्हें देखकर स्वतः ही अच्छी बातें सीख जाते हैं। यह बात अंतरराष्ट्रीय राम स्नेही संप्रदाय के आचार्य स्वामी रामदयाल जी महाराज ने कही l
उन्होंने कहा कि समाज में एक बड़ी विडंबना यह देखी जा रही है कि दूध निकालने के बाद गायों को सड़कों पर आवारा छोड़ दिया जाता है। इस पर चिंता व्यक्त करते हुए सवाल उठाया गया है कि ऐसी स्थिति में हम गाय को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा कैसे दिला पाएंगे? गाय की सुरक्षा और सम्मान के प्रति समाज को जागरूक होने की आवश्यकता है।
राष्ट्र की उन्नति का सीधा संबंध नागरिकों के स्वावलंबन से है। जब राष्ट्र का प्रत्येक नागरिक स्वावलंबी (आत्मनिर्भर) होगा, तभी एक स्वाभिमानी और सशक्त राष्ट्र का सपना साकार हो पाएगा।








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