
उदयपुर, दिनांक 28 मई | जनमत मंच के तत्वावधान में “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” विषय पर ऑन लाइन व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जनमत मंच के संस्थापक, अध्यक्ष डॉ. श्रीनिवास ने कहा की यह अभियान राजस्थान सरकार द्वारा जल संरक्षण हेतु शुरू किया गया | यह अभियान मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में हर साल 25 मई (गंगा दशहरा) से 5 जून (विश्व पर्यावरण दिवस) तक चलाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य जल प्रबंधन को केवल एक सरकारी कार्यक्रम न रखकर, इसे जनता के सहयोग से एक जन आंदोलन बनाना है।अभियान के मुख्य उद्देश्य जल स्रोतों का जीर्णोद्धार कर मानसून के आने से पहले पारंपरिक जल स्रोतों जैसे बावड़ियों, कुओं, झीलों और स्थानीय तालाबों की सफाई, मरम्मत और अतिक्रमण हटाना। वर्षा जल संचय सरकारी और निजी भवनों की छतों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को चालू और सक्रिय करना। वृक्षारोपण के तहत हरियालो राजस्थान’ एवं सार्वजनिक जमीनों और मंदिर परिसरों में स्थानीय पौधों को लगाना। जन जागरूकता स्कूलों और कॉलेजों में प्रभात फेरी, जल चौपाल, निबंध लेखन एवं चित्रकला प्रतियोगिताओं के जरिए लोगों को पानी बचाने के लिए प्रेरित करना आदि । डॉ श्रीनिवास ने बताया कि जल एक अनमोल प्राकृतिक संसाधन है। हमें पीने, खाना पकाने और साफ-सफाई के लिए पानी की आवश्यकता होती है। चूंकि जल सीमित है, इसलिए इसे बर्बाद न करना महत्वपूर्ण है। जल संरक्षण का अर्थ है केवल उतनी ही मात्रा में उपयोग करना जितनी आवश्यकता हो और रिसाव होने पर तुरंत उसे ठीक करना।
जल सभी जीवित प्राणियों के लिए जीवन का मुख्य आधार है। इसके बिना पृथ्वी पर किसी भी प्रकार के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। पृथ्वी का लगभग 71% हिस्सा जल से घिरा है, लेकिन पीने योग्य पानी 3 % से भी कम भाग है। इसलिए, जल संरक्षण और इसका सही उपयोग आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
मच के सचिव शिरीष नाथ माथुर ने बताया कि- जल संरक्षण का अर्थ है पानी की बर्बादी रोकना और प्राकृतिक स्रोतों को सुरक्षित रखना है। पृथ्वी पर पीने योग्य पानी बहुत सीमित है, इसलिए ‘जल है तो कल है एवं दैनिक जीवन में पानी व्यर्थ न बहे | जल संरक्षण को हेतु जागरूकता फैलाना आवश्यक है |
पर्यावरण संरक्षण हेतु कार वॉशिंग सेंटर को कुछ माह के लिए प्रतिबंधित कर देना चाहिए या वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट स्थापित कर पानी को बचाना प्राथमिकता हो |
इस अवसर पर मंच के सचिव डॉ. प्रियदर्शी ओझा , विनोद कुमार चौधरी एवं डॉ. कुणाल आमेटा आदि ने बताया कि जल संरक्षण केवल सरकार का काम नहीं है, बल्कि हर नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी हो एवं व्यक्तिगत स्तर पर जन संरक्षण आवश्यक हो !








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