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सहिष्णुता के अभाव के कारण परिवार में बिखराव


✍️ कांतिलाल मांडोत की कलम से…..

जो रात दिन असहिष्णुता की चिनगारियों में झुलसते हुए जी रहे है,उन्हें सहिष्णुता के आनन्द की अनुभूति नही हो सकती।थोड़ा सहिष्णुता से जुड़कर जीना सीखिये।इससे तनावों और संघर्षो का विलय होता है।परिवार का प्रेम खंडित क्यो होता है?जाति और समाज मे संघर्षो को बल क्यो मिलता है?राष्ट्र राष्ट्र आपस मे क्यो टकराते है?यह स्पष्ट है कि सहिष्णुता और समता के अभाव में जहर का वातावरण निर्मित हो जाता है।आज सहिष्णुता के प्रयोग की जबरदस्त आवश्यकता है।यदि हम सहिष्णुता को निरन्तर खोते ही चले गये तथा विषमताओं एवं उतेजनाओ से प्रेरित और प्रभावित बन गये तो भविष्य क्या होगा,इसकी हम कल्पना भी नही कर सकते।क्रोध और अहंकार आत्म विकास में अवरोधक एवं घातक दुर्गुण है।क्रोधी एवं अहंकारी व्यक्ति असहिष्णु होते है और ऐसे व्यक्ति न केवल अपना,अपितु अन्यो का अनिष्ट करने में भी नही चूकते।जागरूक जन वे है,जो अपने मन मे क्रोध और अहंकार को प्रविष्ट होने का अवसर ही नही देते है।सहिष्णुता से जुड़ा व्यक्ति कायर नही अपितु शूरवीर होता है अपकारी के प्रति उपकार की भावना यही तो जीवन का उदात्त दृष्टिकोण है।जो  प्रभाव सहिष्णुता अथवा समता का होता है,वह असहिष्णुता और विषमता का नही होता।आज समाज मे असहिष्णुता वाले अधिक मिल जाएंगे।परिवार के परिवार क्रोध की ज्वाला में स्वाहा हो रहे है।क्रोधी व्यक्ति को अच्छे बुरे का आभास नही होता है।परिवार के सदस्यों की हत्या तक करने के लिए तैयार हो जाते है।क्रोध और अहंकार विषैले विकार है।इससे हमेशा दूर रहना चाहिए।
      *कांतिलाल मांडोत*

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