
12 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद संत ईश्वरदास जी ने मां से मांगी भिक्षा, गुरु आदेश का किया पालन
भींडर/राठौड़ा का गुड्डा (कन्हैया लाल मेनारिया बासड़ा)। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर अखाड़ा बालाजी आश्रम, राठौड़ा का गुड्डा सिंहाड़ में श्रद्धा, भक्ति और वैराग्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। परम् पूज्य संत श्री ईश्वरदास जी महाराज ने अपने गुरु के आदेशानुसार 12 वर्षों की कठिन तपस्या एवं साधना पूर्ण करने के उपरांत अपनी सांसारिक माता एवं घर से भिक्षा ग्रहण कर गुरु परंपरा का पालन किया। इस भावुक एवं आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में संत, श्रद्धालु, ग्रामीण एवं परिवारजन उपस्थित रहे।
आश्रम में वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक विधि-विधान के साथ कार्यक्रम आयोजित हुआ। संत ईश्वरदास जी महाराज ने अपनी माता के चरणों में श्रद्धापूर्वक भिक्षा ग्रहण कर त्याग, तपस्या, विनम्रता और गुरु आज्ञा के प्रति पूर्ण समर्पण का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस दृश्य को भाव-विभोर होकर देखा तथा इसे भारतीय सनातन गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत स्वरूप बताया।
इस अवसर पर विभिन्न स्थानों से पधारे संत-महात्माओं ने गुरु की महिमा, साधना के महत्व और सेवा भाव पर अपने प्रेरक विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गुरु की आज्ञा का पालन ही सच्ची साधना का आधार है तथा संत ईश्वरदास जी महाराज का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आश्रम में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने संतों के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा पूजा-अर्चना में भाग लिया। दिनभर भजन-कीर्तन एवं धार्मिक वातावरण बना रहा। आश्रम की ओर से सभी श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम के दौरान आसपास के गांवों से आए ग्रामीणों, संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने आश्रम की व्यवस्थाओं की सराहना की !








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