


मावली (नरेन्द्र त्रिपाठी)!तुलसी विवाह एवं सर्व समाज (सनातनी हिंदू) सामूहिक कन्या विवाह गड़वाड़ा,भानसोल (घासा) में संपन्न हुआ ,निर्धन एवं जरूरतमंद परिवारों की कन्याओं का निशुल्क विवाह अक्षय तृतीया विक्रम संवत 2082 को युवा जागृति संस्थान,नाथद्वारा के ध्वज के नीचे भागवत आचार्य पंडित मदन मोहन शर्मा चरण निशांत भैया के अथक प्रयासों से एवं परम पूज्य आई मां श्री कंकू केसर माँ गड़वाड़ा, गड़वाड़ा ग्राम ,परिवार की मेजबानी में तुलसी विवाह एवं सर्व हिंदू समाज का सामूहिक विवाह महोत्सव संतों के सानिध्य एवं दानदाताओं व धर्म प्रेमियों की सेवा भावना से सानंद संपन्न हुआ।
“विधिहि विचारि भवन सब आए। देख सुभग मंडप मन भाए।। सुमन वृष्टि नभ होहिं बहोरी। मंगल गावात सुर मृदु बोरी।।” परम पूज्य 1008 श्री ज्ञानानंद जी सरस्वती कैलाश टेकरी खमनोर, परम पूज्य 1008 महंत योगी श्री हरि नाथ जी गोरख धाम आश्रम मुंबई (देवल आश्रम सरसुनिया) ,परम पूज्य संत श्री शिवानंद जी महाराज श्री राम दरबार बालाजी मंदिर, नाथद्वारा ,की पावन सन्निधि में विवाह क्षेत्र महाकुंभ की याद दिला रहा है ।विधायक पुष्कर लाल डांगी( मावली विधानसभा )प्कृष्ण गोपाल पालीवाल विधानसभा प्रभारी बीजेपी जैसे विभिन्न राजनीतिक विचारधारा के सनातनी हिंदूत्ववादी महानुभावों ने भी पूरे मनोयोग से विवाह महोत्सव में भाग लिया।
परम पूज्य आई माँ श्री सोनल माता मंदिर भानसोल-गड़वाड़ा पूरा मंदिर परिसर संतो के सानिध्य एवं परम पूज्य आई श्री कंकू केसर माता गड़वाड़ा की अगवानी महाकुंभ स्थल लग रहा है पंडित ज्योतिषी श्री भैरू शंकर जी शर्मा एवं मुरलीधर जी शर्मा तथा बिसों आचार्य- सहचार्यों की सहज सात्विक वृति तथा स्वर मुक्त कंठ से वेद मंत्रों के उच्चारण द्वारा सामूहिक विवाह महोत्सव वैदिक रीति से सानंद संपन्न हुआ।
ऐसी विवाह पद्धति की सभी ने सराहना की ।गड़वाड़ा ग्रामवासी एवं कंकू केसर माता का पूरा पैतृक परिवार अपनी बेटी के विवाह की तरह ही 29 अप्रैल 2025 रात्रि से भजन संध्या ,वियालु, प्रातः कलेवा, ज्योनार, शोभायात्रा में जिस खुशी से झूमते हुए सेवा में लगा हुआ, बस उनकी आंखों की चमक यह कह रही थी कि केवल और केवल किसी को कोई कष्ट न हों लगे रहे।
शोभायात्रा भानसोल गांव के चारभुजा मंदिर से सौभाग्याकांक्ष तुलसी माता -चिरंजीव शालिग्राम जी के वेवाण के साथ सभी वर- वधु बग्गी में बिराजे डीजे व ढोल के ढमके के साथ भानसोल व गड़वाड़ा के मुख्य बाजारों में होते हुए परम पूज्य आई श्री सोनल माता मंदिर गड़वाड़ा के मुख्यद्वार पर पहुंची जहां सौ. तुलसी माता – चिं.शालिग्राम जी का स्वागत किया एवं तोरण- मारने की रिति को निभाते हुए सास द्वारा स्वागत कर वर वधु को मंडप चवरियों तक नाचते गाते मंगल बधावे गाते हुए पहुंचाया गया।
हिंदू वैदिक रीति से वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ पंडित भैरूशंकर जी शर्मा ने पंडित समूह द्वारा विवाह रीति संपन्न करवाई। सभी उपस्थित धर्म प्रेमियों ने मुक्त हस्त से कन्यादान किया कुर्सी सेट, आभूषण, अलमारी ,बिछोना सेट व पलंग सहित बर्तन ,वस्त्र आदि भेंट किये मुख्य अजमान के रूप में सर्वश्री नंदकिशोर बंग के साथ ही कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति प्रकट की जिन में सर्व श्री मदन जी मालानी ,श्री मदन सिंह चौहान मारुति होटल ,श्री विशाल माहेश्वरी नाथद्वारा ,महेंद्र सिंह जी सोलंकी अकोला (चित्तौड़) ,मितुल भाई गांधी मुंबई, जयेश भाई जोशी मुंबई, माहेश्वरी महिला मंडल नाथद्वारा ,भागवत प्रचार समिति गायत्री नगर, मावली, आदि कई संगठनों के व्यक्तियों की सेवाएं सराहनीय रही।
तुलसी विवाह एवं सर्व सनातन हिंदू सामूहिक विवाह महोत्सव में महंत अवधेशानंद जी सूरजकुंड राजसमंद, अखिल भारतीय साहित्य परिषद सह संगठन मंत्री श्री मनोज के साथ माननीय दिनेश सोनी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चालक नाथद्वारा खंड ,श्री महेंद्र सिंह चुंडावत (रामनगर )प्रौढ कार्य प्रमुख राजसमंद विभाग, श्री विजेश सामाजिक समरसता संयोजक राजसमंद विभाग ,कृष्णकांत जी सोनी आदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दायित्वान कार्यकर्ताओं की उपस्थिति भी रही। यहां पर नायक(1) रेगर (2)भील(6) सुथार (3)आदि परिवारों के 12 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ।
बेसन चक्की नुक्ति आदि मिष्ठानों के साथ भोजन प्रसादी में कौन कहां बैठा, कौन किस जाति से है ,कौन परोस रहा है, कहीं कोई विचार ही नहीं, ऐसे समरस जीवन की झांकी चारों तरफ दिखाई दे रही थी। झूठे अस्पृश्यता का कोई वातावरण नहीं था । देख कर सबका मन प्रसन्न था। प्रहलाद जी चारण से पूछा तो बताया कि आई मां के यहां तो पहले भी इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में भी यही झांकी दिखाई दी, पंडित मदन मोहन जी ने भी बताया कि इसी कारण से इस स्थान का चयन किया गया है इस बार पुरानी यादों को लेकर क्षेत्र के 12 ही भागलों (आसपास के गांव के) नागरिक उत्साह से भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया और अन्य लोगों ने भी यही बताया कि ऐसे आयोजन होते ही रहने चाहिए।
संत श्री ज्ञानानंद जी सरस्वती ने महा कुंभ द्वारा घोषित “मंत्र हिंदवा सोदरा सर्वे न हिंदू पतितो भवेत ।मम दीक्षा हिंदू रक्षा मम मंत्र समानता ” का उद्घोष करते हुए कहा कि बटोगे तो कटोगे ,संगत व पंगत चलती रहनी चाहिए ।राष्ट्र हित का चिंतन पहले हो, गांव परिवार व जाति अंत में। कश्मीर की घटना को याद दिलाते हुए कहा कि वहां जाति नहीं पूछी केवल हिंदू को गोली मारी गई। हमें शत्रु बोध रहना चाहिए ।अपने संस्कारों को बनाएं रखने परिवार में कम से कम सप्ताह में एक दिन एक समय साथ बैठे । समाज को अपने आप को जगाना होगा तभी धर्म बचेगा ।सभी संतों ने वर- वधु को जीवन जीने की अच्छी शिक्षा व आशीष दी तथा जीवन में कभी भी व्यसन नहीं करने का निवेदन किया। तथा उपस्थित जन समूह को व्यसनमुक्त समाज बनाने का आह्वान किया। यह ऐतिहासिक कार्यक्रम क्षेत्र वासियों को हमेशा याद रहेगा ऐसा उत्साह ,ऐसा मेल, ऐसी रंगत पहले कभी देखने में नहीं आई।ऐसे आयोजन समय-समय पर सभी स्थानों पर होते रहने ही चाहिए ।यह भावनाएं प्रकट हो रही थी, आधुनिक खर्चों को देखकर के सामान्य परिवारों के पीसने की व्यथा अनायास ही प्रकट हो रही थी।








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