गोगुंदा ( कांतिलाल मांडोत) ! हमारे देश मे सत्ता प्राप्ति के लिए अनेक संघर्ष हो रहे है।विधानसभा चुनाव के लिए दिल्ली में राजनैतिक दल एक दूसरे पर कीचड़ उंडेल रहे है।चुनाव में अवैध तरीके नही अपनाने चाहिए।हम देख रहे है कि जनता सत्ता देना जानती है तो सत्ता से बेदखल करना भी जनता को खूब आता है।कभी कभी विचार पैदा होता है कि कुर्सी के लिए कुकरमुत्तों की तरह निकले राजनैतिक दल किस तरह से राजनैतिक रंगमंच का मोहरा बनते जा रहे है।देश में अनेक समस्याओ से जनता जूझ रही है।दिल्ली विधानसभा में एक दूसरे को भला बुरा कह रहे है।इंटरनेट और मीडिया के युग मे नेता जिस तरह से अपनी कन्नी काटते नजर आ रहे है।उनको इस बात का अंदाज तो होना चाहिए कि जनता सबकुछ जानती है।जुठ पर जुठ परोसा जाता है।सोशल मीडिया सक्रिय है।राष्ट्र को जाति, धर्म ,सम्प्रदाय और भाषा न जाने कौन कौन से रोग लग गए है।भारत ने अपनी आजादी अहिंसा और सत्याग्रह से प्राप्त की थी।मगर सत्ता के भूखे लोग पद और प्रतिष्ठा पाने के लिए अन्य मार्ग का सहारा ले रहे है।सत्ता का संघर्ष प्रत्येक युग मे होता रहा है ।देश मे आतंक वाद का सहारा लेकर क्या कुछ नही किया गया है।देश की सत्ता पर चाहे किसी भी दल का शासन हो,परन्तु सभी की भावना राष्ट्र सेवा ,जन सेवा की रहनी चाहिए।देश मे नेताओ को ऐसे आदर्श उपस्थित करने चाहिए कि आने वाली पीढ़ी उनसे कुछ सीख सके।मात्र आदर्श की बात करने से कुछ नही होता।गाँधीजी की तरह उसे कार्य रूप में ढालने की आवश्यकता है।आज नेता तो कुकरमुत्तों की तरह पैदा हो गये, परन्तु नेतृत्व का अभाव हो गया।चुनाव में किस तरह की भाषा का उपयोग कर रहे है।यह हम देख रहे है।दिल्ली विधानसभा चुनाव की बात ही कर लीजिए।किस तरह से आरोप प्रत्यारोप की झड़ी लगी हुई है।क्या इन नेताओं की आदत से जनता वाकिब नही है?इनकी कार्यप्रणाली पर जनता की नजर नही है।मीडिया में अनाप शनाप अभद्र भाषा का उपयोग कर मतदाताओ की नजर से गिरते नजर आ रहे है।महिला पर टिप्पणी करना और बेबुनियाद आरोप मढ़ना उचित नही है।आप,कांग्रेस और भाजपा के नेता एक दूसरे दल पर सीधा हमला बोल रहे है।केजरीवाल राष्ट्र निर्माण की बात करते थकते नही है।उनके षडयंत्र की बू आ रही है।गरीबो के उत्थान,नारी के समान की बात करता है तो लगता है यह जनता को बेवकूफ बाना रहा है।आवश्यकता इस बात की है कि नई पीढ़ी में अनुशासन, प्रेम,भाईचारा एवं राष्ट्र भक्ति पैदा की जाये।मनुष्य ही नही,बल्कि पशु पंक्षियों के प्रति भी उनमे प्रेम हो।नई पीढ़ी को सकारात्मक शिक्षा देने की जरूरत है।आज की पीढ़ी कल की राष्ट्र निर्माता है।युवा पीढ़ी को नकारात्मक भाव से दूर रखें।आज का नवयुवक अपना अधिकांश समय फालतू कार्यो में व्यतीत कर देते है।समाज और राष्ट्र सेवा की बात सोचने का उनके पास समय ही नही है।आज के विद्यालय उनको कैसी शिक्षा दे रहे है।यह तो वह देश है,जहा तक्षशिला और नालन्दा जैसे विश्वविद्यालय थे।दुनियाभर से ज्ञानार्जन हेतु जहा विद्यार्थी आते थे।जहाँ ज्ञान के साथ नैतिकता की शिक्षा दी जाती थी।विधालयो में स्वावलम्बन की भावना पैदा की जाती थी।जीवन व्यवहार शिक्षा का महत्वपूर्ण अंग था।उसमें छनकर निकलने वाले निष्ठावान और राष्ट्रभक्ति में डूबे सराबोर नजर आते थे।आज भी परम्परा को पुनर्जीवित करने की जरूरत है।भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास तो देशभक्तों से भरा पड़ा है।आज नवयुवकों में राष्ट्र भक्ति की भावना पैदा करने की महती आवश्यकता है।बालको को अहिंसा और कर्तव्य पालन सिखाने की जरूरत है।हमे विश्व मे ऐसा आदर्श प्रस्तुत करना है,जिससे देश मे शांति रहे औऱ हमारे पड़ोसी भी हमे देखकर अपनी चंहुमुखी प्रगति कर सके।आज के युवाओ को अपने विचार,परम्पराये और बड़े बुजुर्गों के अनुभवों का नई पीढ़ी को लाभ उठाकर राष्ट्र निर्माण का व्रत लेना चाहिए।संकीर्ण और विभाजनकारी कदमो को रोकना चाहिए।बंधी हुई झाड़ू के तिनके विभाजित होकर बिखरते है तो घर मे कचरे का ढेर लग जाता है।युवाओ को संगठन के साथ अपना लक्ष्य निर्धारित करके आगे बढ़ना है।युवाओ को राष्ट्र की जिम्मेदारी अपने हाथ लेनी है।







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