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संत अमरा भगत की 184वीं जयंती पर गाडरी समाज का गुजरात और महाराष्ट्र से भी उमड़ा युवाओं का सैलाब

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संत अमरा भगत की 184वीं जयंती पर गाडरी समाज की भव्य वाहन रैली; गुजरात और महाराष्ट्र से भी उमड़ा युवाओं का सैलाब

भींडर , बासड़ा (कन्हैया लाल मेनारिया )।अखिल भारतीय धनगर गाडरी समाज की ओर से आराध्य देव संत शिरोमणि श्री अमरा भगत जी की 184वीं जयंती के पावन अवसर पर एक ऐतिहासिक और भव्य वाहन रैली का आयोजन किया गया। इस महा-आयोजन में समाज की अटूट आस्था, एकता और संगठन की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली, जिसमें स्थानीय लोगों के साथ-साथ गुजरात और महाराष्ट्र से आए हजारों युवाओं ने भाग लिया।दूधा महाराज की धूणी से हुआ शंखनादवाहन रैली का भव्य शुभारंभ मण्डिकपुरा स्थित दूधा महाराज की धूणी से पूजा-अर्चना और संतों के आशीर्वाद के साथ हुआ। रैली शुरू होते ही पूरा क्षेत्र “संत अमरा भगत की जय” और “जय श्री कृष्णा” के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। सैकड़ों बाइकों और गाड़ियों का काफिला बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और डीजे पर बज रहे भक्ति गीतों की धुन के साथ आगे बढ़ा।वड़ली चौराहे पर हुआ पलक-पावड़े बिछाकर स्वागतरैली जैसे ही हिंता टोल नाका के पास वड़ली चौराहे पर पहुंची, वहां पहले से मौजूद डोड़ीयों का खेड़ा एवं खीमाखेड़ा के समाजजनों ने पूरे उत्साह के साथ काफिले पर पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया। इस दौरान समाज के वरिष्ठ जनों और प्रबुद्ध नागरिकों ने रैली की अगवानी की। स्वागत कार्यक्रम के दौरान ऊँकार लाल, रूपलाल, मांगीलाल, शंकरलाल, हेमराज, लालूराम, शंकर लाल गाडरी सहित समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।युवाओं में दिखा भगवा जोश, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में मंगल गीत गाती नजर आईं महिलाएंरैली का नजारा बेहद मनमोहक और अनुशासित था। एक तरफ जहां समाज के पुरुष और युवा हाथों में भगवा ध्वज लहराते हुए बाइकों पर अनुशासन के साथ चल रहे थे, वहीं दूसरी तरफ समाज की महिलाएं, युवतियां और बच्चे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर पारंपरिक मंगल गीत गाते हुए रैली की शोभा बढ़ा रहे थे।मुंबई से अनगढ़ बावजी (नरबदिया) तक का सफरइस वर्ष की रैली की सबसे खास बात यह रही कि गुजरात और महाराष्ट्र में रोजगार व व्यवसाय के सिलसिले में रह रहे समाज के युवाओं ने मुंबई से एक विशेष वाहन रैली की शुरुआत की। यह रैली विभिन्न राज्यों और जिलों से होकर गुजरते हुए सीधे संत अमरा भगत की मुख्य तपोस्थली नरबदिया स्थित अनगढ़ बावजी धाम पहुंची। इतनी दूर से आए युवाओं के जोश ने पूरी रैली में एक नई ऊर्जा फूंक दी।एकता और जागरूकता का संदेशइस अवसर पर समाज के प्रबुद्ध जनों ने संबोधित करते हुए कहा कि संत अमरा भगत की जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि हमारे समाज की आस्था, एकता, संगठन और सामाजिक जागरूकता का जीवंत प्रतीक है। देश के कोने-कोने (विशेषकर गुजरात-महाराष्ट्र) से समाज के भाइयों और युवाओं का इस तरह एकजुट होना यह दर्शाता है कि गाडरी समाज अपनी संस्कृति और जड़ों से कितनी मजबूती से जुड़ा हुआ है।

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