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महाराज शक्ति सिंह जी की 484 वीं जयंती मनाई

उदयपुर , (कन्हैया लाल मेनारिया बासड़ा), 27 मई ! महाराणा प्रताप सिंह जी के छोटे भ्राता महाराज शक्ति सिंह जी की 484 वीं जयंती का आयोजन सुखाड़िया रंगमंच टाउन हॉल उदयपुर में प्रातः 10.00 बजे से भव्य समारोह के रूप में मनाई गई ।
महाराज शक्तिसिंह स्मारक समिति एवं प्रताप शक्ति सेवा संस्थान के तत्वावधान में इस समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर परसर्व समाज की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही ।
समारोह के मुख्य अतिथि के रुप में श्री जी हुजूर एकलिंग दीवान महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ उपस्थित रहे । समारोह की अध्यक्षता महारानी महिमा कुमारी मेवाड़ ने की । विशिष्ट अतिथि इतिहासकार चन्द्रशेखर शर्मा, राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वीर रस के कवि सिद्धार्थ देवल सोषल मीडिया पर अपनी प्रस्तुतियों के लिए प्रसिद्ध गोविंद मालवीय एवं चित्रकार ओमप्रकाश सोनी भी उपस्थित रहे । समारोह में मेवाड़ के प्रमुख उमराव में राजराणा घनश्याम सिंह जी बड़ी सादड़ी, रावत महेश प्रताप सिंह कोठारिया, रावत महा सिंह बेंगू, रावत जयवर्धन सिंह आमेट, ठाकुर महिपाल सिंह लावा सरदारगढ़, रावत नरेन्द्र सिंह विजयपुर, रावत विक्रम सिंह बोहेड़ा, रावत विश्विजय सिंह लूणदा, रावत युग प्रदीप सिंह हमीरगढ़ सहित शहर विधायक ताराचन्द जैन, पूर्व विधायक प्रीति गजेन्द्र शक्तावत , भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़, मेवाड़ क्षत्रीय महासभा के अध्यक्ष अशोक सिंह मेतवाला, पूर्व उपमहापौर महेन्द्र सिंह शेखावत , पूर्व प्रधान तखत सिंह शक्तावत , श्री गजेन्द्र सिंह बांसी, तेज सिंह बांसी, चन्द्रभान सिंह पीपलिया, शूरवीर सिंह बोहेड़ा, सहित मेवाड़ के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे ।
इस अवसर पर महाराणा विश्वराज सिंह जी मेवाड़ ने कहा कि इतिहासकारों में मतभिन्नता हो सकती है लेकिन यह सर्वविदित है कि महाराज शक्ति सिंह जी ने सच्चाई का साथ दिया एवं मेवाड़ के हित के लिये सदैव खड़े रहे, महाराज शक्ति सिंह जी की जयंती मनाने की सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब हम उनके व्यक्तित्व से प्रेरणा प्राप्त करें ।
समारोह की अध्यक्षता कर रही महारानी साहिबा महिमा कुमारी मेवाड़ ने कहा कि महाराणा कुंभा, महाराणा सांगा, महाराणा प्रताप, राणा राजसिंह एवं महाराज शक्ति सिंह जी का जीवन संघर्ष मयी रहा है, मेवाड़ ने सर्व समाज को साथ लेकर सत्य एवं धर्म की रक्षा के लिए अनगिनत बलिदान दिये हैं ।
इतिहासकार चंद्रशेखर शर्मा ने कहा की महाराज शक्तिसिंह के मेवाड़ के प्रति योगदान का पुनर्मूल्यांकन इतिहास की आवश्यकता है । स्वतंत्र चेता चित्त के धनी होने के बावजूद वे मेवाड़ और अपने कुल गौरव की रक्षा के लिए सदैव सावचेत रहे और हल्दीघाटी युद्ध के निर्णायक पलों में अपने कर्तव्य का निर्वहन कर मेवाड़ और संघर्षकर्ता प्रताप के मार्ग को निष्कंटक बना दिया । अपने शौर्य और पराक्रम के बल पर वेनगढ़, भैंसरोड़गढ़ मुगल आधिपत्य से छीनकर मेवाड़ की सुरक्षा को मजबूत किया । प्रताप ने विजय कटक के डेरे से परवाना जारी कर अपने भाई शक्तिसिंह के योगदान को स्थापित किया । किंवदंतियों और साहित्य के माध्यम से इतिहास में जो उनके योगदान को लेकर भ्रांतियां उत्पन्न हुई वे तथ्यहीन एवं निराधार है वे त्यागी और मेवाड़ के स्वदेश प्रेम से ओतप्रोत व्यक्तित्व के धनी थे, अकबर के मेवाड़ पर आक्रमण की उनकी सूचना चित्तौड़ युद्ध की रणनीति (गुरिल्ला) की दिशा में मुख्य आधार थी जिससे मेवाड़ और राजवंश को सुरक्षा मिली ।
राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वीर रस के कवि सिद्धार्थ देवल ने महाराज शक्ति सिंह पर लिखी कविता से जोश भर दिया ।
अपने राणा उदय सिंह का मान नहीं तोड़ा मैंने, मैं गया कहीं पर मेवाड़ी गुणगान नहीं छोड़ा मैंने।
शेरों की मांदों में कोई विषधर नहीं जना सकता, मैं सूरज हूँ मुझको कोई जुगनू नहीं बना सकता।
कालखंड की बंधी हुई यह ग्रंथि खोल रहा हूँ, झूठों की बस्ती में सच्चा शक्ति बोल रहा हूँ ।
युवा इतिहासकार गोविन्द मालवीय ने अपने उद्बोधन में कहा कि महाराणा प्रताप के छोटे भाई, महाराज शक्तिसिंह जी मेवाड़ के एक महान रणनीतिकार, अप्रतिम राष्ट्रभक्त और शक्तावत वंश के संस्थापक थे। उन्होंने ‘‘ध्वनि युद्ध’’ एवं ‘‘गुरिल्ला वाॅरफेयर’’ जैसी उन्नत सैन्य तकनीकों के माध्यम से मुगलों की रसद और तकनीकी श्रेष्ठता को विफल किया। हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप के प्रति दिखाया गया उनका त्याग आज भी समाज को एकजुटता और राष्ट्र-रक्षा का सबसे बड़ा संदेश देता है। उनका जीवन साहस, स्वाभिमान और सैन्य-विज्ञान का अनूठा संगम है।
इस अवसर पर षिक्षा, खेलकूद, राजकीय सेवा एवं अन्य विषिश्ट उपलब्धियों में समाज की 35 प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया ।
समारोह के दौरान महारणा विषराज सिंह जी मेवाड़ ने चित्रकार श्री ओमप्रकाष सोनी के द्वारा बनाई गई महाराज षक्ति सिंह जी की कृति का अनावरण भी किया ।
महाराज शक्तिसिंह स्मारक समिति एवं प्रताप शक्ति सेवा संस्थान के पदाधिकारियों द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया । समारोह के अंत में सभी पदाधिकारयों को महाराणा विष्वराज सिंह मेवाड़ ने सम्मानित किया ।
इस अवसर पर हनुमान सिंह बारहठ ने महाराज शक्ति सिंह पर स्वरचित गीत प्रस्तुत किया । स्वागत उद्बोधन महाराज रणधीर सिंह भीण्डर द्वारा किया गया एवं आभार ऋतुराज सिंह ओछड़ी ने व्यक्त किया । मंच संचालन अरविन्द सिंह खोड़ियाखेड़ा एवं दिलीप सिंह रुद ने किया ।

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