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शूर्पणखा नकछेदन और सीता हरण का रामलीला में किया गया मंचन

धरणेन्द्र जैन
खेरवाड़ा। श्री राम मंदिर में चल रही रामलीला के छठवें दिन सूर्पनखा नक्छेदन  एवं सीता हरण का मंचन हुआ जिसमें सूर्पनखा आती है और अपने विवाह का प्रस्ताव राम और लक्ष्मण जी के पास रखती है परंतु राम और लक्ष्मण जी मना करते हैं तब जाकर मना करने के उपरांत सूर्पनखा बलपूर्वक अपना विवाह करना चाहती है इस पर लक्ष्मण जी क्रोधित होकर सूर्पनखा का नाक कान काट देते हैं तब शूर्पणखा अपनी कटी हुई नाक लेकर अपने भाई खरदूषक दिशा के पास जाती है और उनको लेकर आती है। युद्ध करती है राम जी एक ही वाण से उनकी समस्त सेना का संघार कर देते हैं और खरदूषण तीसरा का वध कर देते हैं। शूर्पणखा अपने भाई त्रिलोक विजेता राक्षस राज लंकेश रावण के पास जाती है और कहती है की त्रिलोक विजेता मेरे भाई रावण के होते हुए भी मेरी नाक कान काट दी गई दुहाई देने लगती है तब रावण आता है और अपने मामा मरीच की सहायता से सोने के मृग से सीता जी का हरण करके लेकर चला जाता है।
रामलीला मंडल के संचालक पंडित अशोक उपाध्याय जी ने बताया कि आज की रामलीला महिलाओं पर आधारित है। आज रामलीला में हमारी माता बहनों को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। जिस प्रकार से शूर्पणखा अपने विवाह का प्रस्ताव रखा उसे प्रकार से आज भी नगर में गली-गली में से सुरपंखा हैं जो की अपने विवाह का स्वयं प्रस्ताव रखती हैं और किसी अन्य पुरुष के साथ भाग कर दीवार जाती है और फिर बाद में होता है क्या की लव जिहाद का शिकार होती है। यह प्रसंग बहनों के लिए अत्यंत ही ज्ञानवर्धक है कि आपके माता-पिता से अत्यधिक प्यार दुलार आपको कोई नहीं कर सकते। रामलीला का प्रत्येक प्रसंग एवं मानस की प्रत्येक चौपाई मानव जीवन जीने का मार्ग दिखाती है।
रामलीला में नगर के कई वरिष्ठ  उपस्थित रहे।

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