



कई गांवो से लोग देखने पहुंचे ऐतिहासिक महा पर्व जमराबिज, अनवरत 450 वर्षों से निभा रहे हैं ग्रामीण यह परंपरा
मुगलों पर विजय के उपहार में तत्कालिन महाराणा ने मेनार को 17वें उमराव की उपाधि, शाही लाल जाजम, नागौर के प्रसिद्ध रणबांकुरा ढोल, सिर पर किलंगी धारण करने का अधिकार किया प्रदान
गांव के लोग जो देश-विदेश में है कार्यरत, इस मौके पर खास तौर से पहुँचते है गांव
कार्यक्रम में खास तौर से मराठा साम्राज्य बाजीराव पेशवा के पपोत्र श्रीमंत पेशवा महाराज प्रभाकर नारायण राव सा. पेशवा हुए शामिल
भींडर !कन्हैया लाल मेनारिया, बांसडा।।उदयपुर ।15 मार्च :- राजस्थान में होली का जश्न मनाने के लिए बहुत कुछ है। राजस्थान में होली सिर्फ़ रंगों का त्यौहार नहीं है, बल्कि यह राज्य की समृद्ध विरासत और सांस्कृतिक विविधता का उत्सव है, जहाँ हर समुदाय इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक झलक को दर्शाते हुए उत्सव में अपना अनूठा स्वाद जोड़ता है। उदयपुर जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर की दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 पर दो सरोवरों ब्रह्म सागर, ढंड सागर के बीच पहाड़ी पर स्थित मेहतागढ़ मेनार में होली के तीसरे दिन यानी शनिवार कृष्ण पक्ष द्वितीया को मुगलों पर विजयी के उपलक्ष्य में विजयोत्सव के रूप में बारूद से होली खेली गयी, जिसमें तलवारों और बंदूकों की आवाज से हूबहू युद्ध का दृश्य देखने को मिला। ये परंपरा मेनारवासी पिछले सवा 450 साल से अनवरत निभाते आ रहे है।
शनिवार रात एक के बाद एक कई तोप आग उगल रही थीं, तड़ातड़ बंदूकें चल रही थीं। उदयपुर के गांव मेनार में यह दृश्य किसी युद्ध का नहीं, बल्कि होली के जश्न का था। मेनार में देर रात तोपों और बंदूकों ने जमकर आग उगली। हर तरफ तलवारें चलती दिखीं। मौका था शौर्य पर्व जमरा बीज का, जो बड़े धूमधाम के साथ मनाया गया। वहीं गांव के युवा जो दुबई, सिंगापुर, लंदन, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में रहते हैं, वह इस मौके पर सभी गांव पहुंच जाते हैं। पूरा गांव सतरंगी रोशनीयो से एक दुल्हन की तरह सजा धजा। जमराबीज की रात मेनार कस्बा दिपावली की रंगत में रंगा रहा। शौर्य पर्व जमराबीज का यह पारंपरिक आयोजन मेवाड़ में मुगलों की टुकड़ी पर विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
शनिवार दोपहर में शाही लाल जाजम बिछी, जिस पर अमल कसुमे की रस्म हुई, इसमें 52 गांवो से मेनारिया ब्राम्हण के पंच मौतबीर इसके साक्षी बने। वही रणबांकुरे ढोल बजते रहे। राजस्थान के इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड ने भी मेनार गांव का उल्लेख अपनी पुस्तक द एनालिसिस ऑफ राजस्थान में मनिहार नाम के गांव से किया है। इस गांव का संबंध महाराणा प्रताप के पिता उदय सिंह से भी जुड़ा है। अमल कसुबा के दौरान वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी व अखिल भारतीय मेनारिया ब्राह्मण नागदा समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज पानेरी पहुँचे, जिनका ग्रामीणों ने लाल पाग पहनाकर स्वागत किया और अमल कसुबा की रस्म कराई। साथ ही ग्रामीणों ने विधायक से मेनार के इस पर्व के लिए ग्रामीणों को बंदूक लाइसेंस दिलाने की मांग रखी।
रात 9 बजे बंदूकों, तोपो से हुआ युद्ध सा माहौल
रात 9 बजे बाद सभी पूर्व रजवाड़े के सैनिकों की पोशाकों धोती कुर्ता, कसुमल पाग से सजे धजे ग्रामीण अलग अलग रास्तो से ललकारते हुए बंदूक और तलवार लेकर बंदूक दागते हुए सेना के आक्रमण किये जाने के रूप मे श्री चारभुजामंदिर के सामने गांव का मुख्य बाजार ओंकारेश्वर चौक के यहाँ पहुँचे, जहाँ ग्रामीणों ने बंदूक और तोप से गोले दागे तथा पटाखों से आतिशबाजी से आग की लपटें निकली जो काफ़ी ऊँचाई तक जा रही थी, तोपो, बंदूकों की गर्जना 5 किलोमीटर दूर तक सुनाई दे रही थी। वहां बारूद से भरी हुई बंदूकों के साथ आदेश की प्रतीक्षा में खड़े रहे। यह रेजिमेंटल सटीकता के साथ इतनी खूबसूरती से तालमेल बिठाता है और ‘फेरावत’ के एक संकेत पर, चौराहे पर पांच मार्गों पर खड़े लोग एक साथ अपनी बंदूकें हवा में चलाते हैं, जिससे ग्रामीणों को अपना जश्न शुरू करने की अनुमति मिल गयी हो और फिर शाम से शुरू होकर आधी रात के बाद तक बंदूकों, पटाखों या तोपों की गर्जना के बिना एक सेकंड भी नहीं बीतता। तब पांचों रास्तों से गांव बंदूकों, तोपो की आवाज से गूंज उठा, तब युद्ध का परिदृश्य जीवन्त हों उठा और इस बीच पटाखों के धमाकों से दहल उठा ओंकारेश्वर चौक। उसके बाद जैन समुदाय द्वारा अबीर-गुलाल से रणबांकुरों का स्वागत किया गया। इसमें सभी जातियों के सहयोग के लिए नाईयो ने मशालें पकड़ी, तेलियों ने तेल मशालों के लिए तेल हर घर से दिया। नंगारची परिवार बारी बारी से ढ़ोल बजाते हैं। खारोल समाज ने बाजार में मिट्टी नहीं उड़े इसके लिए पानी का छिड़काव किया। रावत, मीणा समाज के लोगों ने गाँव में चौकीदारी के साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को संभाला। इस आयोजन में सभी समाजों का मान सम्मान रखा जाता हैं।
रात 12.15 बजे जमरा घाटी (बोदरी माता घाटी) इतिहास वाचन हेतु होते रवाना
मुख्य चौक पर पटाखों की गूंज, आग के गोले, गरजती बंदूकें, चमकती, खनकती शमशीरों के बीच रात 12.15 बजे सिर पर कलश लिए महिलाएं वीर रस के गीत गाती हुई जमरा घाटी की ओर रवाना होती है। हवाई फायर, गुलाल बरसने के साथ रणजीत ढोल बजते रहे एवं पुरुष आतिशबाजी करते हुए थम्ब चौक की ओर बोदरी माता की घाटी पर 300 मीटर का रास्ता एक घण्टे मे तयकर पहुँचे, जहाँ बोदरी माता की घाटी पर कतारबद्ध जनसमूह के बीच मेनार के शौर्य व वीरता एवं मेनारिया समाज का इतिहास का वाचन किया गया। इसी दौरान गांव की महिलाओं व युवतिया थम्ब चौक पर फेरावतो की कड़ी सुरक्षा में मुख्य होली को शीतल/अर्घ्य करने की रस्म अदा की। यहां से सभी लोग ढोल की थाप पर दोबारा ओंकारेश्वर चौक पर पहुँचते है। जहां ग्रामीणों के एक हाथ मे तलवार और दूसरे हाथ मे खांडा (लकड़ी) लेकर तलवारों की जबरी गैर ढोल की थाप पर खेली गयी जिसे देखकर हर कोई दंग रह जाता है। हजारों लोग रात 8 बजे से मेनार पहुंचे जो भोर तक डटे रहे। यहां दिन-रात भर रणबांकुरे रणजीत ढोल बजते रहे।
गैर होने के पश्चात शुरू हुआ तलवार और गोटा घुमाना
युवाओं, बुजुर्गों द्वारा एक से बढ़कर एक हेरणतंगेज जोशीले अंदाज़ मे दोनों हाथों मे तलवारें लेकर घुमायी गयी और आग के गोटे को घुमाए जिसे देखकर दर्शकों ने अपनी तालियों की गड़गड़ाहट से पूरे चौक को गुंजायमान कर दिया। इस आयोजन को लेकर शाम को 5 बजे से 8 बजे तक घरों में विविध व्यंजन बनाये जाते है तथा मेहमाननवाजी होती है।
खेरोदा थाने व पुलिस लाइन से पुलिस जाप्ता रहा मौजूद
इस आयोजन को लेकर पुलिस उप अधीक्षक वृत्त वल्लभनगर राजेंद्र सिंह जैन के नेतृत्व में खेरोदा थानाधिकारी सुरेश विश्नोई मय जाब्ता मौजूद रहे तथा पुलिस लाइन से पुरुष, महिला जवान तैनात रहे और सारी व्यवस्थाए देखी। हालांकि इस पूरे आयोजन में गांव के ग्रामीण सारी व्यवस्थाए स्वयं देखते है, और किसी प्रकार की कोई घटना, दुर्घटना नहीं होती है। वही मराठा साम्राज्य बाजीराव पेशवा के पपोत्र श्रीमंत पेशवा महाराज प्रभाकर नारायण राव सा. पेशवा, अखिल भारतीय मेनारिया ब्राह्मण नागदा समाज राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज पानेरी, चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी, विधायक वल्लभनगर उदयलाल डांगी, कार्यवाहक वल्लभनगर एसडीएम रमेश सीरवी सहित अन्य मौजूद रहे। सभी अतिथियों का ग्रामीणों की ओर से भव्य स्वागत किया गया और अतिथियों का ऐतिहासिक जमराबिज महापर्व से अवगत कराया गया। कार्यक्रम में मेवाड़, मालवा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, गुजरात, मुंबई एवं पूरे प्रदेश भर सहित आसपास क्षेत्र के सभी गांवो से हज़ारों की संख्या में लोग शामिल हुए।








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