


संस्कार युक्त शिक्षा से राष्ट्र निर्माण का संकल्प लेकर कार्य विस्तार पर दिया जोर
उदयपुर, 6 अक्टूबर। विद्या भारती चित्तौड़ प्रान्त की ओर से आयोजित प्रान्त प्रबन्ध समिति कार्यकर्ता सम्मेलन का मंगलवार को समापन हुआ। समापन सत्र में मुख्य अतिथि विधायक फूलसिंह मीणा रहे। कार्यक्रम में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के मंत्री ब्रह्माजी राव, विद्या भारती चित्तौड़ प्रान्त के अध्यक्ष ललित प्रकाश शारदा, उपाध्यक्ष डॉ. दीपिका राव सहित प्रान्त के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
समापन सत्र का शुभारम्भ वंदना, अतिथि परिचय एवं स्वागत से हुआ। सह प्रान्त मंत्री विमल जैन ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रान्त मंत्री सुरेन्द्र अरोड़ा ने सम्मेलन का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए सम्मेलन में हुए विभिन्न सत्रों एवं गतिविधियों की जानकारी दी।
सम्मान समारोह के प्रथम चरण में सेवा निधि समर्पित करने वाले भामाशाहों तथा शिशु वाटिका, संस्कृति बोध परियोजना, स्वच्छता एवं सेवा निधि के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं एवं संस्थानों को सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि विधायक फूलसिंह मीणा ने कहा कि विद्या भारती में संस्कार और शिक्षा का अनूठा संयोजन है। जनजातीय क्षेत्रों में भी संस्था द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए संस्था निरंतर प्रयासरत है। विद्यालयों में बाल्यकाल से ही राष्ट्रभक्ति के संस्कार दिए जाते हैं, जो जीवनभर बने रहते हैं। उन्होंने कहा कि संस्कारों के माध्यम से बालक के साथ-साथ परिवार भी संस्कारित हो रहे हैं।
मीणा ने कहा कि विद्या भारती के विद्यालयों का अनुशासन अन्य संस्थानों के लिए भी अनुकरणीय है। यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले अनेक पूर्व छात्र आज समाज और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अपने कौशल एवं व्यवहार के माध्यम से अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
मुख्य वक्ता विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के मंत्री ब्रह्माजी राव ने कहा कि विद्या भारती का लक्ष्य विद्यार्थी के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है। पंचकोशात्मक विकास के माध्यम से शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक तथा नैतिक-आध्यात्मिक विकास पर बल दिया जाता है। विद्यार्थी केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज, देश और विश्व कल्याण के लिए जीवन जीने की भावना से तैयार हो, यही शिक्षा का उद्देश्य होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के सम्मान के साथ विद्यार्थियों में अंग्रेजी संचार कौशल भी विकसित किया जाना चाहिए। प्रान्त स्तर पर कम से कम एक इंग्लिश लैब स्थापित करने तथा कौशल विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप ऐसे विद्यार्थी तैयार किए जाएं, जो भविष्य में रोजगार मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार उपलब्ध कराने वाले बनें।
ब्रह्माजी राव ने कहा कि ग्रामीण, दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों तक कार्य विस्तार करना समय की आवश्यकता है। इसके लिए सरस्वती संस्कार केन्द्रों की स्थापना, समाज के भामाशाहों का सहयोग तथा नई पीढ़ी के साथ सतत संवाद आवश्यक है। उन्होंने मातृशक्ति की सहभागिता बढ़ाने, अनुसूचित जाति-जनजाति समाज से अधिक कार्यकर्ताओं को दायित्व देने तथा युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी बल दिया।
उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि आने वाले समय में विद्या भारती “सर्वव्यापी और सर्वस्पर्शी” संगठन के रूप में समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचेगी।
समापन अवसर पर ध्येय गीत “लक्ष्य तक पहुँचे बिना पथ में पथिक विश्राम कैसा…” प्रस्तुत किया गया। सम्मेलन में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने राष्ट्र निर्माण एवं समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा और संस्कार पहुँचाने का संकल्प लिया।मीडिया प्रभारी नरेश नागदा ने यह जानकारी दी ।








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