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आठवें वेतनमान से कर्मचारियों और वेतनभोगियों को सीधा लाभ

गोगुंदा!आठवें वेतनमान की मंजूरी दे दी है।नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में  गुरुवार की बैठक के बाद अश्विनी वैष्णव के कहा कि आठवें वेतन आयोग की घोषणा हुई है जिसमेआठवें आयोग के गठन से 48 .76 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारी और 67.95 लाख पेंशन भोगियो को लाभ मिलेगा।31 दिसम्बर 2025 तक सातवां वेतन आयोग लागू है।सरकारी वेतन ने इजाफा होने के बाद प्राइवेट कम्पनियो ने सुविधा बढ़ा ली है।दिल्ली चुनाव का बिगुल बज चुका है।और केंद्र सरकार की आठवें वेतनमान की घोषणा करना भाजपा के लिए फायदेमंद रहने वाला है।दिल्ली विधानसभा चुनाव में मोदी सरकार ने मतदाताओं को साधने के लिए एक महत्वपूर्ण दांव खेला है।केंद्र सरकार ने पेंशनभोगियों को सीधा लाभ देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए भाजपा के पाले में गेंद डाल दी है।यह मोदी का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।दिल्ली में लाखों की संख्या में चुनाव में अहम भूमिका अदा करते है।सातवें वेतन आयोग की समय सीमा बाकी है।दरअसल,2016 में सातवा वेतन आयोग लागू किया गया था।दिल्ली के कर्मचारियों को बड़ा तोहफा है।यह चुनाव में लाभान्वित करने वाला फार्मूला कह सकते है।मोदी ने बहुत बड़ा दांव खेला है।विपक्ष के पास कोई जरिया नही है।कहे तो किससे कहे क्योंकि मोदी ने कहा था कि विपक्ष कितना ही हंगामा खड़ा क्यो न कर दे।विपक्ष की सोच खत्म होने के बाद मोदी की सोच शुरू होती है।संसद में विपक्ष को घेरते हुए यह बात कही गई थी।आठवा वेतन आयोग की सिफारिशों से भाजपा को फायदा हो सकता है।एक तरफा वोट के लिए यह निर्णायक साबित होगा।सरकार के इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों के  चेहरे खिल गए है।वेतन में बढ़ोतरी होगी और करीब डेढ़ गुना बढ़ोतरी का प्रावधान है।सातवे वेतनमान में अठारह हजार का वेतन सीधा 34 हजार तक होने की संभावना है।इस घोषणा से कर्मचारी खुश है।दिल्ली में नौ लाख से ज्यादा कर्मचारी पेंशन धारक है।इन सभी कर्मचारियों का झुकाव भाजपा की तरफ हो जाएगा।दिल्ली सरकार में काम करने वाले कर्मचारियों की झोली भर्ती दिखाई दे रही है।चार लाख कर्मचारियों का सीधा फायदा भाजपा को होगा।सियासी आरोह अवरोह के बाद अब विपक्ष की परेशानी बढ़ती जा रही है।दिल्ली चुनाव अब द्विपक्षीय होता दिखाई दे रहा है।क्योंकि इसमें कांग्रेस को दोनों तरफ से नुकसान ही उठाना पड़ रहा है।दोनों पार्टियों के बीच का मुकाबला है।अब आप के पास परेशानी से बाहर निकलने के लिए कोई मार्ग नही है।आठवें वेतनमान का दांव भाजपा को सीधा फायदा दे रहा है।क्योकि मोदी की आठवें वेतनमान की सिफारिश के पीछे पार्टी को बहुत बड़ा  लाभ मिलने की संभावना है।भाजपा ने अलग अलग रणनीति तय कर वोटरों को लुभाने निकली है।जिसका फायदा प्रत्यक्ष दिख रहा है।दिल्ली में एक बार सता का स्वाद चखने के बाद 27 साल भाजपा सत्ता से बाहर है।इस बार उम्मीद जताई जा रही है कि भाजपा की साफ छवि पर हावी होकर केजरीवाल की धूलमिल छवि पर कटाक्ष कर सियासी गलियारों तक पहुंचने में सफल हो सकती है।मोदी शाह की जोड़ी 2014 के बाद एक के बाद एक कई राज्य में परचम लहरा रही है।भाजपा विकास को बढ़ावा दे रही है।जबकि विपक्ष अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए जाना जाता है।दो चुनाव में केजरीवाल के समक्ष फीके साबित हुए है।और दोनों विधानसभा चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है।दिल्ली का चुनाव भाजपा के लिए इसलिए हम  है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव नाक का सवाल बन गया है।आठवें आयोग के जरिये भाजपा सियासी समीकरण बदल पाती है या नही?
       ✍️कांतिलाल मांडोत की कलम से….

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