राजस्थान में आर्थिक व पर्यावरणीय सुधार को लेकर बड़ा प्रस्ताव, राज्यपाल से लेकर मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, सहित राजस्थान के सभी विधायकों-सांसदों तक भेजा गया पत्र
भीलवाड़ा ,( जय प्रकाश शर्मा),बनेड़ा! राजस्थान में आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय सुधारों को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। पर्यावरण संरक्षण संस्थान, भीलवाड़ा के चेयरमैन सीएस राजू जाट बरण ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा , उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, प्रेम चाँद बैरवा सहित राज्यपाल, तथा सभी विधायकों एवं सांसदों को एक विस्तृत नीति-आधारित पत्र प्रेषित किया गया है।
पत्र में राज्य की वर्तमान आर्थिक स्थिति, जलवायु परिवर्तन और अलनीनो (El Niño) जैसी वैश्विक जलवायु घटनाओं के प्रभाव का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि राजस्थान जैसे शुष्क एवं कृषि-प्रधान राज्य में मानसून की कमजोरी, वर्षा में कमी, सूखे की स्थिति और बढ़ते तापमान के कारण कृषि उत्पादन तथा ग्रामीण आय पर गंभीर असर पड़ रहा है। इससे आम नागरिकों की क्रय शक्ति में कमी आई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
इस पत्र के माध्यम से “जनता अनुदान अधिकार बिल” लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर, पिछड़े, श्रमिक, किसान तथा गुमन्तु-अर्धगुमन्तु परिवारों (जिनकी वार्षिक आय ₹50,000 से कम है) को प्रति माह ₹2100 की प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता (DBT) प्रदान करने की मांग की गई है।
पत्र में आर्थिक दृष्टिकोण से यह तर्क दिया गया है कि इस प्रकार की सहायता से ग्रामीण क्षेत्रों में मांग (डिमांड) बढ़ेगी, जिससे स्थानीय बाजार, छोटे व्यापार (MSME) और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। इसे “डिमांड-ड्रिवन ग्रोथ” का आधार बताया गया है, जिससे राज्य की समग्र अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है।
इसके साथ ही कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का न्यूनतम 10 प्रतिशत हिस्सा पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन में अनिवार्य रूप से निवेश करने का सुझाव भी दिया गया है। इसमें जल संरक्षण, वनीकरण, भूजल पुनर्भरण, सूखा-रोधी कृषि तकनीक और ग्रामीण जलवायु अनुकूल अवसंरचना के विकास जैसे कार्य शामिल हैं।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस प्रकार के निवेश से दीर्घकाल में जल संकट कम होगा, कृषि उत्पादकता बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में “ग्रीन जॉब्स” के अवसर उत्पन्न होंगे। साथ ही आय असमानता में कमी, ग्रामीण पलायन में गिरावट और सामाजिक स्थिरता को भी बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञ दृष्टिकोण के अनुसार, इस प्रस्ताव से राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में वृद्धि, उपभोग एवं निवेश के बीच संतुलन तथा राजस्थान को “क्लाइमेट रेजिलिएंट इकोनॉमी” बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सीएस राजू जाट बरण ने अपने पत्र में राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि इन प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक नीतिगत एवं विधायी कदम उठाए जाएं, ताकि राजस्थान को एक मजबूत, समावेशी और सतत विकास मॉडल के रूप में स्थापित किया जा सके।








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