

बहन डॉ .गीता वार्ष्णेय एम एस सी, एमफिल, पीएच. डी
संग आ कुँवर डॉ.शिव रत्न वार्ष्णेय आई .एफ.एस
के वैवाहिक वर्षगाँठ के महापर्व पर गीत का उपहार प्रेषित कर रही हूँ !
नवी मुंबई। डॉ मंजु गुप्ता वाशी । प्रीत का मधुमास ले गीत
प्रीत का मधुमास ले फिर से, पर्व प्रणय का लाया।
कामदेव -रति की प्रणय कथा , बाँचने अरुण आया।।
हुए अधर रक्तिम वंसुधरा,
घूँघट में शरमाई।
आई ऋतु है प्रेम मिलन की,
घर -द्वारे फगुनाई।।
सीमाएँ सब तब टूट गई , रूप -स्पर्श भरमाया।
इश्कि इन्द्रधनुषी रंग में , भँवरा था मंडराया।।
कामदेव -रति की प्रणय कथा , बाँचने अरुण आया।।
छोर क्यारियों के एक हुए,
गंध फूल को चूमें।
चली मदहोश दृग पुरवाई ,
नव सपन लिए घूमें।।
मुदित मन हिलोरे स्पंदित थीं , मदन रसपान भाया।
अवनी अंबर तब एक हुए , प्रेम काम सरसाया।।
कामदेव -रति की प्रणय कथा , बाँचने अरुण आया।।
झूमर बिंदिया कंगन से वधु
सोलह शृंगार करे।
साल गिरह परिणय की आयी,
नेह सुमन सेज झरे।।
संध्या रानी के मुख पर था , मादल इक टकराया।
रुक जा चंदा इक पल को तू , आज रसराज छाया।।
कामदेव – रति की प्रणय कथा , बाँचने अरुण आया।।








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