Home » आज फोकस में » महाराज शक्तिसिंहजी जयंती 27 मई को चितौड़ दुर्ग पर समारोह पूर्वक मनाई जाएगी

महाराज शक्तिसिंहजी जयंती 27 मई को चितौड़ दुर्ग पर समारोह पूर्वक मनाई जाएगी

भींडर (कन्हैयालाल मेनारिया बासड़ा)!चितौड़ दुर्ग स्थित बाण माता मंदिर परिसर में महाराज शक्तिसिंह स्मारक समिति व प्रताप शक्ति सेवा संस्थान की ओर से 27 मई को महाराज शक्तिसिंह जी जयंती समारोह के आयोजन को लेकर तैयारी बैठक वल्लभनगर के पूर्व विधायक महाराज रणधीर सिंह भींडर के मुख्य आतिथ्य व ठाकुर ऋतुराज सिंह ओछ्ड़ी की अध्यक्षता में आयोजित की गई,
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस वर्ष महाराज शक्तिसिंह जयंती समारोह का आयोजन चितौड़ दुर्ग पर किया जाएगा,महाराज शक्तिसिंह जयंती समारोह की शुरुआत गत वर्ष 2024 में भींडर राजमहल से हुई थी,अद्भुत संजोग रहा है कि हिन्दू तिथि के अनुसार महाराणा प्रताप जी व महाराज शक्तिसिंह जी का जन्म ज्येष्ठ शुक्ला तृतीया को एक ही दिन हुआ था लेकिन महाराज शक्तिसिंह जी का जन्म महाराणा प्रताप के जन्म के दो वर्ष बाद 1542 में हुआ था,ज्येष्ठ शुक्ला तृतीया महाराणा प्रताप जयंती को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है इसलिए यह निर्णय लिया गया कि 1542 में ज्येष्ठ शुक्ला तृतीया को अंग्रेजी तिथि 27 मई थी उसी दिन महाराज शक्तिसिंह जयंती मनाई जाए ताकि महाराणा प्रताप जयंती में भी सभी शामिल हो सके,महाराज रणधीर सिंह भींडर ने बाण माता को निमंत्रण के निमित्त पीले चावल भेंट किए,समारोह में शक्तावतों के सभी ठिकानों से समस्त शक्तावत सिरदारों को आमंत्रित किया जाएगा,बैठक में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष कुलदीप सिंह सुवावत, अर्जुन सिंह बुरछा सरपंच जोधपुर,दिलीप सिंह रुद,नरेंद्र सिंह नरधारी,शिवराज सिंह घटियावली,विजयराज सिह रुद,परमवीर सिंह पिपलाज,वैभवप्रताप सिंह पांसल,यशपालसिंह मिन्नाणा,अरविंदसिंह खोड़ियाखेड़ा,भानूप्रताप सिंह नाहरगढ़,कमलेंद्र सिंह खोड़ियाखेड़ा,शक्तिसिंह बाघेलों का खेड़ा,सुल्तानसिंह कर्णपुरा,हिम्मत सिंह रठांजना,महिपाल सिंह खेताखेड़ा,प्रह्लाद सिंह धरोल,आदि उपस्थित थे,
इतिहास के जानकार अरविंद सिंह खोडियाखेड़ा व वैभवप्रताप सिंह पांसल ने बताया कि महाराज शक्तिसिंह जी जिनका मेवाड़ के इतिहास में अतुलनीय योगदान है,महाराज शक्तिसिंह जी जिन्होंने 1567-68 में अकबर के चितौड़ पर आक्रमण की सूचना सर्वप्रथम महाराणा उदयसिंह जी को दी थी जिसके कारण ही मेवाड़ राजपरिवार सुरक्षित रह पाया,1576 हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप जी का पीछा कर रहे खुरासान व मुल्तान मुगल सैनिकों को मारकर प्रताप की रक्षा की,फ़िर स्वयं का घोड़ा प्रताप को भेंटकर युद्ध क्षेत्र से सकुशल निकलने में मदद करने वाले महाराज शक्ति सिंह जी ही थे,हल्दीघाटी में महाराज शक्तिसिंहजी द्वारा दिए गए योगदान के परिणामस्वरूप महाराणा प्रताप जी ने महाराज शक्तिसिंहजी व उनके वंशजों को “राणावल्लभ” की उपाधि प्रदान की,राणावल्लभ का अर्थ होता है “राणा का अत्यंत प्रिय” महाराज शक्ति सिंह जी के 17 पुत्र हुए जिनमे से 8-10 पुत्रों ने विभिन्न युद्धों में मेवाड़ की रक्षार्थ बलिदान दिया।

Leave a Comment

Modi 3.0 के पहले आम बजट से मिडिल क्लास को मिलेगी राहत?