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वो राजनेता राजनेता ही नहीं है जो कवि के व्यंग मात्र से नीचता पर आ जाये : कवि बलवन्त बल्लु

खैरवाड़ा। ऋषभदेव के कवि बलवन्त बल्लु ने कुनाल कामरा द्रारा एक पेरोडी को गाई जाने वाली पेरोडी को जायज बताते हुए कहा की कवि की कविता पेरोडी या उसके व्यंग को राजनेताओं को अपना आंतरिक चरित्र का अध्ययन करना चाहिए ना की आर्टिस्ट के स्टूडियो में जा कर तोड़ फोड़। श्री बल्लु ने उक्त तोड़ फोड़ को विधि विरुद्ध बताकर कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कुनाल कामरा को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने की महाराष्ट्र के राज्यपाल से की है।

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