
दिल्ली विधानसभा चुनाव खत्म होते ही सबकी नजर एक्जिट पोल के आंकड़ो पर नजर है।11 में से 9 एक्जिट पोल ने भाजपा को बहुमत के करीब बताया है तो 2 एक्जिट पोल ने अरविंद केजरीवाल की जीत बताई है।लेकिन सही नतीजे 8 फरवरी को प्राप्त होंगे।कई महीनों की मशक्कत और वादे ,घोषणाओं और रेवड़ियों आदि का ऐलान के बाद दिल्ली विधानसभा का चुनाव चुनौतियों से कम नही था।भाजपा के लिए केजरीवाल को हराना प्रतिष्ठा का सवाल है तो केजरीवाल की जीत किसी चुनौती से कम नही है।केजरीवाल ने जिस तरह दिल्ली में हर वर्ग को साधते हुए रेवड़ियों का बाजार लगा दिया,वही भाजपा उन रेवड़ियों की विरोधी रही है ।दरअसल, केजरीवाल ने रेवड़ियों के बल पर सत्ता हासिल भी की है।एक्जिट पोल की माने तो इस बार भाजपा 27 सालों के बाद सता में लौट रही है।लेकिन यह कहना बहुत जल्दबाजी होगा क्योंकि परिणाम 8 फरवरी को आएगा।1993 में भाजपा दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत का परचम लहराया था।पांच वर्ष में तीन सीएम बदले गए थे।उसके बाद भाजपा सत्ता से दूर है।कांग्रेस की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित लगातार 15 वर्ष तक सत्ता में थी।उसके बाद दिल्ली विधानसभा में कांग्रेस की हालत पतली ही है।दिल्ली में कांग्रेस 1 या तीन सीट पर सिमट कर रह गई है।एक्जिट पोल के अनुसार इस बार कांग्रेस 1 या 2 सीट पर ही सिमट कर रह सकती है।मदनलाल खुराना भाजपा के मुख्यमंत्री रहे थे ,उनके बेटे हरीश खुराना राजनीति में सक्रिय है तो साहिब सिंह वर्मा के बेटे दिल्ली विधानसभा के प्रत्याशी है।भाजपा सत्ता में थी उस दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री रह चुके है।इस बार भाजपा की घर वापसी का अनुमान लगाया जा रहा है।दिल्ली में टॉक ऑफ टाउन है कि इस बार सरकार भाजपा की बनने जा रही है।लेकिन एक्जिट पोल के मूल्यांकन से यह कहना अभी ठीक नही है। अनुमान के तौर पर किसी की जीत या हार निश्चित नही की जा सकती है।कई बार एक्जिट पोल के नतीजे टाय टाय फीस होते दिखाई देते है।भाजपा आप और कांग्रेस अपनी अपनी जीत का दावा करती दिख रही है।आप चौथी बार सरकार बनाने का भरोसा जता रही है तो कांग्रेस का कहना है कि इस बार किसी को बहुमत नही मिलने वाला है।यह पार्टी के अपने दावे और विश्वास है जबकि केजरीवाल की इस बार सीटे भले ही मिल जाए, लेकिन सरकार बनाने के लिए दांतो तले चने चबाने होंगे।केजरीवाल को दिल्ली विधानसभा के समय भाजपा ने घेरे रखा।केजरीवाल की योजना और घोषणाओं की सच्चाई जनता के सामने रखने में भाजपा सफल हुई,वही कांग्रेस ने भी केजरीवाल को जूठा और भ्रष्टाचारी कहने में कोई कसर नही छोड़ी।दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक्जिट पोल की पोल खुलती नजर आई।2020 में एक्जिट पोल की गणित गलत साबित हुई।दिल्ली विधानसभा चुनाव में 2020 में 12 एक्जिट पोल ने अनुमान के आंकड़े जनता के सामने रखे,लेकिन 1 ही एक्जिट पोल सही साबित हुई।2015 ने दिल्ली विधानसभा के एक्जिट पोल के आंकड़े पेश करने वाले सभी गलत साबित हुए,वैसे ही 2013 में एक एक्जिट पोल नतीजों के करीब थी।एक्जिट पोल वोट की गिनती तक तसल्ली देने के लिए एक औषधि से कम नही है।एक्जिट पोल नेताओ की अच्छी नींद के लिए रामबाण इलाज है।क्योंकि कई दिनों तक प्रचार में थके हारे नेताओ के लिए एक्ज़िट पोल आराम के उपयोगी साबित होती है।चुनाव के पूर्व की जाने वाली घोषणाओ को एक कागज का पुलिंदा समझा जाता है,वैसे ही एक्जिट पोल एक अनुमानित आंकड़ा पेश करती है।जिसका सटीक आंकलन करना बहुत बड़ी भूल है।








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