
खैरवाड़ा (धरणेन्द्र जैन)। पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के संघस्थ शिष्य प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन का 50 वाँ जन्मदिवस श्रावण शुक्ला सप्तमी, 31जुलाई 2025 को पूज्य गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ सानिध्य में दिगम्बर जैन मंदिर रायगंज अयोध्या में सानंद मनाया गया।
अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन जयपुर के अनुसार *युवा परिषद् एवं श्री दिगम्बर जैन अयोध्या तीर्थक्षेत्र कमेटी* के तत्त्वावधान में डॉ. जीवन प्रकाश जैन, निधेश जैन, परमेन्द्र जैन, पारस जैन ‘बबुआ’, शरद जैन, अध्यात्म जैन, सरस जैन ‘शैंकी’ आदि अनेक महानुभावों द्वारा विजय कुमार जैन को तिलक, माल्यार्पण के साथ उनके कार्यों की सराहना से सहित एक अभिनंदन पत्र भी भेंट किया गया। इस अवसर पर पूज्य पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी ने भी विजय जी को तिलक व माल्यार्पण किया और संघस्थ ब्र. बीना बहनजी, कुमुदिनी अम्माजी आदि ने उन्हें स्नेहपूर्वक उपहार भेंट करके जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं।
अभिनंदन पत्र का वाचन युवा परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जीवन प्रकाश जैन जम्बूद्वीप, हस्तिनापुर द्वारा किया गया।
इस अवसर पर विजयजी ने सर्वप्रथम भगवान पार्श्वनाथ का निर्वाण कल्याणक मनाते हुए भगवान का मस्तकाभिषेक सम्पन्न किया और 31 फुट ऊँची भगवान ऋषभदेव प्रतिमा पर दुग्धाभिषेक कर पुण्य कमाया।
निर्वाणलाडू आदि समर्पित करते हुए उन्होंने भगवान के श्रीचरणों में 50 फल भी समर्पित किये।
इसी प्रकार अपने गुरुजन पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी, प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी व पीठाधीश स्वामीजी के चरणों में भी 50-50 फलों से समन्वित अर्घ्य थाल चढ़ाकर सभी का आशीर्वाद प्राप्त किया। पूज्य माताजी ने उन्हें शास्त्र प्रदान करके स्वस्थ, दीर्घ और ज्ञानवर्धक जीवन का मंगल आशीर्वाद दिया।
बाहर से पधारे पदाधिकारियों ने विजय जी को वस्त्र भी भेंट किए और समूचे अयोध्या तीर्थ के स्टॉफ में मिष्ठान्न वितरित करके खुशियाँ मनाईं। इस अवसर पर डॉ. जीवन प्रकाश ने विनयांजलि स्वरूप अपने विचार व्यक्त करते हुए युवा परिषद, अयोध्या कमेटी एवं विद्वत् महासंघ की ओर से विजय जी के पुण्य की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ, यशस्वी और मंगलमयी जीवन की कामनाएँ भी कीं।
ज्ञात होवे कि प्रतिष्ठाचार्य विजय जी युवा परिषद के राष्ट्रीय मुख्य संयोजक और तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत् महासंघ के महामंत्री होने के साथ ही बड़ी मूर्ति-अयोध्या तीर्थ, जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर, नंद्यावर्त महल तीर्थ-कुण्डलपुर, आचार्य श्री शांतिसागर धाम-सम्मेदशिखर जी आदि अनेक तीर्थों की समितियों में प्रमुख पद पर अपनी धार्मिक, सामाजिक सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं।
आपके प्रतिष्ठाचार्यत्व में ऋषभगिरि-मांगीतुंगी महाराष्ट्र के 108 फुट भगवान ऋषभदेव से लेकर अभी तक शताधिक पंचकल्याणक प्रतिष्ठाओं में सहस्रों जिनबिम्बों की प्रतिष्ठाएँ भी सम्पन्न हुई हैं और सैकड़ों विधि-विधान, अनुष्ठान भी आपके द्वारा अभी तक सम्पन्न कराये जा चुके हैं।







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