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खैरवाड़ा में राम कथा का मंगलमय प्रारंभ, उमड़ा राम भक्तों का सैलाब

खैरवाड़ा (धरणेन्द्र जैन)। सावन मास की पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा से अभिसिंचित इस पुण्य अवसर पर खेरवाड़ा के पावन राम मंदिर प्रांगण स्थित सत्संग भवन में 15 दिवसीय श्रीराम कथा का भव्य शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। शिवभक्ति के प्रतीक इस मास में जब राम नाम का साधन किया जाए, तो वह विशेष फलदायक माना जाता है। अतः सावन की पुण्य धारा में कथा का प्रारंभ अपने आप में अत्यंत मंगलकारी एवं सार्थक रहा।
कथा का प्रारंभ श्रीराम मंदिर के  महाराज द्वारा मंगलाचरण के साथ विधिपूर्वक हुआ।
कथा के आरंभ में गोस्वामी तुलसीदासजी के जीवन व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा संस्कृत से प्रारंभ की, किन्तु जन-सामान्य की बोधगम्यता हेतु अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना की। यह ग्रंथ आज भी जनमानस में रामभक्ति की अमिट ज्योति प्रज्वलित करता है। विशेष रूप से कथा का आरंभ गुरु, भगवती सरस्वती, श्रीगणेश एवं अन्य दैवी शक्तियों की भावपूर्ण वंदना से हुआ।  ‘राम’ शब्द की महिमा का विवेचन करते हुए वंदना के माध्यम से समदृष्टि, सहिष्णुता और आध्यात्मिक उदारता का सशक्त संदेश प्रदान किया।
प्रवचन के मध्य शिव-सती प्रसंग को अत्यंत मार्मिक एवं सजीव भाषा में प्रस्तुत किया गया। दक्ष यज्ञ, शिवजी का अपमान तथा सती के आत्मोत्सर्ग जैसे प्रसंगों को कथा व्यास ने सहजता, गरिमा और गहन भावनात्मकता के साथ प्रस्तुत कर श्रोताओं के अंतर्मन को छू लिया। सावन मास में शिव तत्व की यह व्याख्या श्रोताओं के लिए विशेष रूप से सार्थक रही।
कथा  में रामचरितमानस के मंगलाचरण श्लोकों का सामूहिक गायन राग, ताल और समाजगान की शैली में हुआ, जिसने वातावरण को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।
इस प्रकार राम कथा का प्रथम दिवस भक्ति, भाव, और संस्कृति का अनुपम संगम सिद्ध हुआ, जिससे श्रोता न केवल भावविभोर हुए, अपितु आत्मिक शांति की अनुभूति से भी परिपूर्ण हो उठे।

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