
खैरवाड़ा। प्राचीन दूर्ग पर स्थित श्री शीतला माता मंदिर पर शीतला सप्तमी की पूजा आज धूमधाम से हुई। शक्तिपीठ के पीठाधीश्वर महान संत महंत परम पूजनीय, प्रातः स्मरणीय संतमहंत भारत भूषण महाराज ने बताया की यह दिन मां शीतला की पूजा के लिए समर्पित होता है। उन्हें चेचक, त्वचा रोग को ठीक करने वाली देवी भी कहा जाता है। आज के बाद से बासी आहार ग्रहण नहीं करना चाहिए। गर्म पानी से नहीं नहाना चाहिए। शीतल भोजन ग्रहण करना चाहिए। पौराणिक मान्यता है कि माता शीतला, देवी पार्वती का ही रूप हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शीतला माता की पूजा-अर्चना करने से घर-परिवार में खुशहाली आती है। शीतला माता को जल, कुमकुम, अक्षत, लाल रंग के फूल, रोली, हल्दी, दीपक, बासी भोजन, और सोलह श्रृंगार की सामग्री चढ़ाई गई। आरती, कीर्तन के साथ परमेश्वरी देवी के जयकारे लगाये गये । इसके साथ बरगद का पेड़ के पूजा भी की गई। महिलाओं की रेलमपेल रही।शक्तिपीठ के संरक्षक पं. कृष्ण गोपाल जोशी,आचार्य लावण्य जोशी के सानिध्य में पूजन विधि उपक्रम हुए।








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