
बाँसड़ा ( कन्हैया लाल मेनारिया ) होली का पर्व विभिन्न क्षेत्रों ने भिन्न भिन्न प्रकार से मनाया जाता है , उदयपुर जिले के धर्मनगरी खरसाण गांव मे होली का त्यौहार अलग ही प्रकार से मनाया जाता है यहा पर युवा अंगारों से होली खेलते है , यहां के युवा जलती हुई आग मे कूदकर होली को तोड़ते हैं , यहां की होली 25 फिट से भी ज्यादा बडी होती है ,साथ ही होली के आसपास कांटेदार झाड़ियो का ढेर व इसके अलावा 8से10 क्विंटल लकड़ियों का ढेर पड़ा होता है , शुभ मुहूर्त में होली को आग देने के बाद करीब आधी होली जल चुकी होती है तब गांव के युवाओं में जलती हुई होली को तोड़ने की होड़ शुरू होती हैं जो जब तब होली नहीं टुटती है त्तब तक अंगारों में कूद कर होली को तोड़ने का प्रयास जारी रहता हैं , होली को तोड़ने के बाद गांव के बाहर कुआ, बावड़ी मे डाली जाती हे , यह परंपरा कई सालों से चल रही है ,होली के अगले दिन धुलंडी के दिन गांव की महिलाओं के द्वारा होली को ठंडी करने के लिए एक साथ आती हैं उसके बाद गांव में धुलंडी खेलना शुरू की जाती हैं।








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