भारतीय संस्कृति मानवता,त्याग सहिष्णुता औऱ धर्म के अमृत से सिंचित रही है-जिनेन्द्रमुनि मसा
गोगुन्दा ( कांतिलाल मांडोत)! आज विश्व सभ्यता के सर्वोच्च शिखर की ओर ऊपर उठ रहा है।हर और प्रगति का शंखनाद सुनाई दे रहा है ज्ञान के ऊपर विज्ञान हावी होता जा रहा है।सभ्यता के मुकाबले हमारी मानवीय संस्कृति लड़खड़ा रही है।संस्कृति तो आंतरिक विकास है जो अचानक समाप्त नही हो सकता।भवन नष्ट हो सकते है,पुल … Read more
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