
भीलवाड़ा , (जय प्रकाश शर्मा)!बनेड़ा उपखण्ड क्षेत्र के मुशी (मुसी) स्थित श्री शनि महाराज मंदिर में चल रहे , 9 कुण्डात्मक नव दिवसीय श्री शनि महाराज नवग्रह महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में प्रतिदिन भक्तों की भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।
श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिवस में ऐसा दिव्य और भावुक वातावरण बना कि श्रद्धालु भक्ति में पूरी तरह डूब गए। पूज्य साध्वी आरती जी वैष्णव, महाकाल आश्रम मधुसूदनगढ़ (गुना) के श्रीमुख से निकली अमृतमयी वाणी ने हजारों श्रद्धालुओं के हृदय को स्पर्श कर दिया। कथा पंडाल में उपस्थित हर व्यक्ति कभी भावुक हुआ, कभी आनंद में झूम उठा और कभी अपनी आंखों से आंसुओं को रोक नहीं पाया।
कथा में विशेष रूप से बहन-बेटियों और युवाओं को जीवन की अमूल्य सीख दी गई। पूज्य साध्वी जी ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों पर विश्वास करके उन्हें पढ़ने के लिए बाहर भेजते हैं, मोबाइल दिलवाते हैं, ताकि उनका भविष्य उज्ज्वल बन सके। लेकिन आज कई बच्चे उस विश्वास का गलत उपयोग कर सोशल मीडिया और गलत संगति में पड़कर अपने संस्कार और भविष्य दोनों खो रहे हैं। कथा के माध्यम से युवाओं को संदेश दिया गया कि माता-पिता का सम्मान करें, क्योंकि जिन माता-पिता की दुआ साथ होती है, उसी संतान का जीवन सफल और सुखमय बनता है।
राजस्थान की संस्कृति और पारंपरिक पहनावे का भी अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया। साध्वी जी ने कहा कि राजस्थान केवल एक राज्य नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, परंपरा और गौरव की पहचान है। यहां की वेशभूषा, रीति-रिवाज और संस्कार दूर से ही भारतीय संस्कृति की झलक दिखा देते हैं। पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कथा के मध्य जब पूज्य साध्वी जी ने “मां” की महिमा का वर्णन किया, तब ऐसा भावुक दृश्य बना कि हजारों श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। साध्वी जी ने कहा कि मां वह तपस्या की मूर्ति है, जो स्वयं दुख सहकर अपनी संतान को बड़ा करती है, भूखी रहकर भी बच्चों का पेट भरती है, रात-रातभर जागकर बच्चों का भविष्य बनाती है। लेकिन दुख तब होता है जब बड़े होकर बच्चे यही कह देते हैं — “मां, तुमने हमारे लिए किया ही क्या है?” यह सुनकर पूरा पंडाल भावुक हो उठा और कई श्रद्धालु अपनी आंखों से आंसू नहीं रोक पाए।
इसके पश्चात भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की दिव्य कथा सुनाई गई। जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आया, पूरा वातावरण “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। भक्तगण भक्ति में झूम उठे और ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं वृंदावन धाम धरती पर उतर आया हो। कथा में बताया गया कि जब-जब पृथ्वी पर अत्याचार, अधर्म और पाप बढ़ता है, तब-तब भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं।
हजारों की संख्या में माताएं-बहनें तेज धूप के बावजूद अपने घरों से निकलकर कथा स्थल पर एक घंटे पहले पहुंचकर श्रद्धा भाव से विराजमान हो जाती हैं। यह दृश्य सनातन संस्कृति और श्रद्धा की जीवंत मिसाल बन चुका है। श्रद्धालु कथा सुनकर भावविभोर हो रहे हैं और पूज्य साध्वी आरती जी का हृदय से धन्यवाद कर रहे हैं कि उन्होंने समाज को केवल भक्ति ही नहीं, बल्कि संस्कार, परिवार और मां-बाप के सम्मान का संदेश भी दिया।
यह भव्य नौ दिवसीय आयोजन यज्ञ सम्राट पूज्य श्री श्री 1008 प्रमोद दास जी महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न हो रहा है। प्रतिदिन प्रातःकाल आचार्य श्री विकास जी शास्त्री जयपुर द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ नारायण भगवान का हवन कराया जाता है तथा रात्रि में भगवान श्रीरामचंद्र जी की दिव्य लीलाओं का मंचन रामलीला के रूप में किया जाता है, जिसका श्रद्धालु भक्तिभाव से आनंद ले रहे हैं।
धन्य हैं ऐसे संत, धन्य है ऐसी कथा, और धन्य हैं वे श्रद्धालु जिन्हें इस दिव्य महोत्सव में उपस्थित होकर भक्ति और संस्कारों का अमृत प्राप्त हो रहा है।








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