
उदयपुर ,अप्रैल 04 | जनमत मंच के तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय “बारूदी सुरंग” जागरूकता दिवस पर व्याख्यान का आयोजन किया गया | इस अवसर पर जनमत मंच के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. श्रीनिवास महावर ने बताया कि-प्रत्येक वर्ष 4 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय बारूदी सुरंग जागरूकता और बारूदी सुरंग नियंत्रण सहायता दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 8 दिसंबर, 2005 को घोषित किया गया था। इस दिवस का उद्देश्य बारूदी सुरंगों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, बारूदी सुरंग नियंत्रण कार्यों के लिए सहायता का अनुरोध करना और उनके उन्मूलन की दिशा में प्रगति करना है। संयुक्त राष्ट्र बारूदी सुरंग नियंत्रण सेवा के मार्गदर्शन में अंतर्राष्ट्रीय बारूदी सुरंग नियंत्रण समुदाय, इस दिवस से एक सप्ताह पहले ही अपनी कार्ययोजना बनाना शुरू कर देता है।
अंतर्राष्ट्रीय बारूदी सुरंग जागरूकता दिवस का इतिहास
8 दिसंबर 2005 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने घोषणा की कि 4 अप्रैल को औपचारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय बारूदी सुरंग जागरूकता और बारूदी सुरंग कार्रवाई सहायता दिवस के रूप में प्रतिवर्ष मनाया जाएगा। इसे पहली बार 4 अप्रैल 2006 को मनाया गया। राज्यों द्वारा निरंतर प्रयास, साथ ही संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य संबंधित संगठनों की सहायता से उन देशों में राष्ट्रव्यापी बारूदी सुरंग कार्रवाई क्षमता स्थापित करने और विकसित करने में सहायता की जाती है जहां युद्ध के बारूदी सुरंग और विस्फोटक अवशेष लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं, एवं राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर आर्थिक और सामाजिक विकास में बाधा डालते हैं।
मंच के सचिव शिरीष नाथ माथुर ने बताया कि -दुनिया भर में हर इस दिन बारूदी सुरंगों के प्रति जागरूकता और बारूदी सुरंग कार्रवाई में सहायता के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बारूदी सुरंगों और युद्ध के विस्फोटक अवशेषों से लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और जीवन को होने वाले खतरों के बारे में जागरूकता फैलाना और राज्य सरकारों को बारूदी सुरंगों को हटाने के कार्यक्रम विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है। औसतन हर घंटे एक व्यक्ति विस्फोटक उपकरण से मारा जाता है या घायल हो जाता है। पीड़ितों में कई बच्चे भी शामिल हैं। विस्फोटक उपकरणों का उपयोग बढ़ गया है, जिससे नागरिक आतंकित हो रहे हैं और मानवीय कार्यकर्ताओं और संयुक्त राष्ट्र मिशनों और कर्मियों पर खतरा बढ़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, दुनिया भर में अभी भी कम से कम 60 देशों में बारूदी सुरंगें हैं, जिनमें से कुछ सुरंग 50 साल से भी अधिक पुरानी हो चुकी है जिनका मानव सुरक्षा की दृष्टि कोण से रखरखाव अति महत्वपूर्ण है , जो की आज के समय की महती आवश्यकता है |
सहायक आचार्य हेमंत कुमार डामोर एवं धर्मेंद्र कुमार वर्मा ने ताया कि –
हर साल न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में, यूएनएमएएस (UNMAS) बारूदी सुरंगों, युद्ध के विस्फोटक अवशेषों और तात्कालिक विस्फोटक उपकरणों से उत्पन्न खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक मल्टीमीडिया प्रदर्शनी का आयोजन करता है। यूएनएमएएस ने “सेफ ग्राउंड” अभियान से संबंधित एक सार्वजनिक फोटो प्रदर्शनी की घोषणा की है, जो बारूदी सुरंगों के खिलाफ कार्रवाई, खेल और सतत विकास लक्ष्यों के बीच संबंध को भी बढ़ावा देती है। यह दर्शाती है कि कैसे बारूदी सुरंगों वाले क्षेत्रों को खेल के मैदानों से प्रतिस्थापित करने से समाज एकजुट होते हैं और सशस्त्र संघर्ष के पीड़ितों और बचे लोगों के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
इस अवसर पर सहायक आचार्य, आजाद मीणा ने बताया कि –
दुनिया भर के कई देश बारूदी सुरंगों से जूझ रहे हैं, जिनमें अफगानिस्तान, इराक, यमन, सीरिया, कंबोडिया, कोलंबिया और अफ्रीकी देश शामिल हैं।
ये बारूदी सुरंग पर्यावरण समस्या, समाज और खास तौर पर आर्थिक विकास में रुकावट उत्पन्न कर रही है। युद्धों और संघर्षों के कारण बारूदी सुरंगों की समस्या दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है।








Users Today : 29