

मुगलों पर विजय की स्मृति में बारूद की होली, 200 गांवों का जनसैलाब उमड़ा मेनार
शौर्य, परंपरा और एकता का संगम: मेनार में 17वें उमराव की विरासत आज भी कायम
विधायक से ग्रामीणों की मांग- इस पर्व के लिए खास तौर से ग्रामीणो को दिया जाए बंदूक का लाइसेंस
वल्लभनगर ! राजस्थान में होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि शौर्य, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है। इसी कड़ी में उदयपुर जिले से करीब 45 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर ब्रह्म सागर और ढंड सागर सरोवरों के मध्य पहाड़ी पर स्थित मेहतागढ़ मेनार में होली के तीसरे दिन कृष्ण पक्ष द्वितीया को ऐतिहासिक जमराबीज महापर्व विजय उत्सव के रूप में मनाया गया। मुगलों पर विजय की स्मृति में मनाए जाने वाले इस पर्व में बारूद से होली खेली गई। रात भर तोपों और बंदूकों की गर्जना से पूरा गांव गूंज उठा और तलवारों की चमक के बीच युद्ध जैसा परिदृश्य जीवंत हो उठा। मेनारवासी पिछले सवा 450 वर्षों से ज्यादा समय से यह परंपरा अनवरत निभाते आ रहे हैं। इस ऐतिहासिक आयोजन को देखने के लिए करीब 200 गांवों से हजारों लोग मेनार पहुंचे। कार्यक्रम की शुरुआत से पूर्व सांय 5 से 7.30 बजे के बीच ग्रामीण आने वाले सभी मेहमानों की मेहमान नवाजी करते हैं।
महाराणा का ऐतिहासिक सम्मान
मुगलों पर विजय के उपलक्ष्य में तत्कालीन महाराणा ने मेनार को 17वें उमराव की उपाधि, शाही लाल जाजम, नागौर के प्रसिद्ध रणबांकुरा ढोल तथा सिर पर किलंगी धारण करने का अधिकार प्रदान किया था। यह सम्मान आज भी ग्रामीण गर्व से निभा रहे हैं। देश-विदेश दुबई, सिंगापुर, लंदन, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में कार्यरत गांव के लोग भी इस अवसर पर विशेष रूप से मेनार पहुंचते हैं। पूरा गांव सतरंगी रोशनी से दुल्हन की तरह सजा नजर आया और जमराबीज की रात दीपावली जैसी रंगत में रंगी रही।
दिन में अमल कसुमे की रस्म
दोपहर में ओंकारेश्वर चौक पर शाही लाल जाजम बिछाई गई, जहां अमल कसुमे की पारंपरिक रस्म अदा की गई। इस अवसर पर 52 गांवों के मेनारिया ब्राह्मण पंच-मौतबीर साक्षी बने। रणबांकुरा ढोल की थाप के बीच रस्म पूरी हुई। इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड ने भी अपनी पुस्तक द एनालिसिस ऑफ राजस्थान में मेनार (मणिहार) का उल्लेख किया है। गांव का संबंध महाराणा प्रताप के पिता उदय सिंह द्वितीय से भी जुड़ा माना जाता है। अमल कसुमे के दौरान वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी एवं अखिल भारतीय मेनारिया ब्राह्मण नागदा समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज पानेरी, एसआरएम के चेयरमेन हिम्मत सिंह झाला सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने विधायक, समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष व भामाशाह झाला का लाल पाग पहनाकर स्वागत किया तथा विधायक से पर्व के लिए ग्रामीणों को खासतौर से बंदूक लाइसेंस दिलाने की मांग रखी।
रात 10.30 बजे बना युद्ध जैसा माहौल
रात 8 बजे के बाद पूर्व रजवाड़ों के सैनिकों की पारंपरिक वेशभूषा धोती, कुर्ता और कसुमल पाग में सजे ग्रामीण ओंकारेश्वर चौक पहुंचे, जहाँ 8 से 10.30 बजे तक ग्रामीणों ने बंदूक और तोप से गोले दागे तथा पटाखों से आतिशबाजी से आग की लपटें निकल रही थी। वहां बारूद से भरी हुई बंदूकों के साथ मशालो की अगुवाई में फेरावत के आदेश की प्रतीक्षा में खड़े रहे। यह रेजिमेंटल सटीकता के साथ इतनी खूबसूरती से तालमेल बिठाता है, कि फेरावत के एक संकेत पर पांचों मार्गों से एक साथ ललकारते हुए बंदूकें दागते और तोपों से गोले दागते हुए श्री चारभुजा मंदिर के सामने मुख्य बाजार ओंकारेश्वर चौक पर पहुंच एक साथ बन्दुको से हवाई फायर हुए और तोपों से गोले दागे गए। आतिशबाजी की लपटें आसमान तक उठीं और गर्जना पांच किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। आधी रात के बाद तक बंदूकों, पटाखों और तोपों की आवाज से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा। तत्पश्चात जैन समुदाय ने अबीर-गुलाल से रणबांकुरों का स्वागत किया। आयोजन में सभी समाजों की सहभागिता रही नाई समाज ने मशालें संभाली, तेली समाज ने तेल की व्यवस्था की, नंगारची परिवारों ने ढोल बजाए, खारोल समाज ने पानी का छिड़काव किया तथा रावत और मीणा समाज ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली।
जमरा घाटी में हुआ इतिहास वाचन
रात 12:15 बजे महिलाएं सिर पर कलश लेकर वीर रस के गीत गाती हुई जमरा घाटी (बोदरी माता घाटी) के लिए रवाना हुईं। आतिशबाजी और रणजीत ढोल की थाप के बीच जनसमूह जमरा घाटी पहुंचा, जहां नंगारची द्वारा मेनार के शौर्य और मेनारिया समाज के इतिहास का वाचन किया गया। वाचन के बाद महिलाओं ने फेरावतो की कड़ी सुरक्षा के बीच थंब चौक मुख्य होली को अर्घ्य अर्पित किया। इसके पश्चात ओंकारेश्वर चौक पर तलवारों की जबरी गैर खेली गई। एक हाथ में तलवार और दूसरे में खांडा लेकर गैर खेली, इस दौरान ग्रामीणों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए। युवाओं और बुजुर्गों ने आग के गोटे घुमाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
पुलिस जाप्ता रहा तैनात
आयोजन के दौरान पुलिस उप अधीक्षक वृत्त वल्लभनगर राजेंद्र सिंह जैन के नेतृत्व में खेरोदा थानाधिकारी सुरेश विश्नोई मय जाप्ता तथा पुलिस लाइन से पुरुष एवं महिला जवान तैनात रहे। हालांकि पूरे आयोजन की व्यवस्थाएं ग्रामीणों ने स्वयं संभालीं और किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई। कार्यक्रम में अखिल भारतीय मेनारिया ब्राह्मण नागदा समाज राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज पानेरी, विधायक वल्लभनगर उदयलाल डांगी, एसआरएम के चेयरमेन हिम्मत सिंह झाला, सी आर रतन सिंह राठौड़ , वल्लभनगर एसडीएम किरणपाल, तहसीलदार वल्लभनगर सुरेंद्र कुमार छिपा, रेवेन्यू इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह राणावत, अमर सिंह, चंद्रप्रकाश दया, पटवारी सुनील सोनी, गोविन्द सुथार, अरुण गोदारा सहित अन्य मौजूद रहे।
मेनार जमराबीज पर बनी फ़िल्म के पोस्टर का विमोचन
शिवकला मोशन पिक्चर के बैनर तले बनी मेनार के ऐतिहासिक महापर्व जमराबीज पर निर्मित फ़िल्म का डायरेक्टर प्रदीप शर्मा ने ओंकारेश्वर चौक में अमल कसूबे की रस्म के दौरान फ़िल्म का पोस्टर का स्थानीय विधायक उदयलाल डांगी, समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज पानेरी, एसआरएम के चेयरमेन हिम्मत सिंह झाला व ग्रामीणों द्वारा विमोचन किया गया। डायरेक्टर प्रदीप शर्मा ने कहा कि मेनार का जमराबीज महापर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि मेवाड़ की वीर परंपरा, सामाजिक एकता और ऐतिहासिक गौरव का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा, जिसने एक बार फिर इतिहास को वर्तमान में साकार कर दिया।








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