




वल्लभनगर, (कन्हैया लाल मेनारिया)!विराट हिंदू सम्मेलन पुरिया खेड़ी मंडल वल्लभनगर का आयोजित हुआ, जहां सुगन ज्योति जी साध्वी सालोर अनूप जी महाराज रामकाज आश्रम घणोली खोडिया जी बावजी भोपाजी भग्गा जी एवं मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक श्री हरि शंकर जी भाई साहब उपस्थित रहे।
पूरिया खेड़ी, बालाथल, विजयपुरा, बडलिया, वाजमियां, गोटीपा रेबारियों की ढाणी,मुंडोल आदि वास स्थान से हजारों स्त्री पुरुष शोभा यात्रा के रूप में खोडिया जी बावजी मंदिर मुंडोल के प्रांगण में एकत्र हुए और विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन हुआ।
भोजन प्रसादी के बाद में कार्यक्रम पूर्ण हुआ।
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों के भोपाजीऔर पूजारियों का सम्मान किया गया। तथा पूर्व सैनिकों का सम्मान किया गया।भारत माता पूजन से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ एवं भारत माता की आरती और भोजन मंत्र के बाद भोजन प्रारंभ किया गया ।सभी लोगों ने बैठ के भोजन का आनंद लिया घनोली गौशाला रामकाज आश्रम के अनुप दास जी ने संगठित रहने, गौ – भक्ति तथा संस्कार एवं शिक्षा पर अपने विचार व्यक्त किया। साध्वी सुगन ज्योति सालों ने मातृ शक्ति को लक्ष्य करते हुए आपने बताया कि केवल शिक्षा नहीं संस्कार भी महत्वपूर्ण है और संस्कार की प्राथमिक शिक्षा माता के सिवा और कोई नहीं दे सकता है माता धाम की दूरी प्रथम शिक्षक है उन्होंने संकल्प दिलाया कि हमारे घर से निकलने वाला बच्चा तिलक लगा करके विद्यालय जाए ।माता-पिता के चरण स्पर्श करें और अपने घर में शास्त्र शास्त्र सब रखें उन्होंने बहनों को आग्रह किया कि कम से कम चार पुत्र को जन्म दें- एक संघ कार्य के लिए, एक फौज के लिए, एक शिक्षक और चौथा अपनी परंपरा को चलाने के लिए। राम,कृष्ण, शिवाजी और प्रताप माता की कोख में और गोद में ही बनते हैं। कई बार छोटे-छोटे संकल्प दिलाकर पर्यावरण, सामाजिक समरसता, नागरिक शिष्टाचार और स्वबोध भाषा भूषा भवन भोजन आदि अपने होने चाहिए पर अपनी गहन पकड़ के साथ विषय को प्रभावी ढंग से रखा प्रसंग के साथ रखा और अंत में भजन गायन कर भाव विभोर कर दिया मुख्य वक्ता श्री हरि शंकर जी ने राष्ट्र पहले भारत भक्ति जगाने के लिए हम क्या थे क्या हो गए लेकिन हजारों सालों की गुलामी और संघर्ष के काल से निकलकर माताओं के और इन भोपाओं के धार्मिक संस्कारों के बल पर भारत आज भारत रह पाया है, बताते हुए संघ साधना के 100 वर्षों और हिंदू सम्मेलनों के कारणों को गिनते हुए अपने विचार व्यक्त किया ।अंत में ‘नीला घोड़ा का असवार,’ गीत बोलकर प्रताप के जीवन वृत और उनके साथियों को याद करते हुए अपने विषय को पूर्ण किया ।मंदिर परिसर में माता अहिल्याबाई होल्कर, रानी ऐबका ,भीमराव अंबेडकर, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह श्री गुरु जी डॉक्टर केशव राव बलिराम हेडगेवार, स्वामी विवेकानंद, गोविंद गुरु, संत रविदास आदि अनेक महापुरुषों विराट कट आउट लगाए गए जो समाज को प्रेरणा दे रहे थे। शोभा यात्रा के साथ डीजे झांकियां ऊंट गाड़ियां घोड़े आदिकाल आवाज में साथ चल रहा था पुरिया खेड़ी से चलकर पश्चिम दिशा की ओर गोटीपा से उत्तर दिशा की ओर एवं वाजमियां से पूर्व दिशा की ओर रेलिया चलती हुई मुंडोल खोडियाजी बावजी के स्थान पर त्रिवेणी संगम के रूप में आकर शोभा यात्रा धर्म सभा में परिवर्तित हुई ।लोगों के अनुसार कोई 5000 से अधिक लोगों का वहां जमावड़ा रहा ऐसा कार्यक्रम हर वर्ष हो अंत में ऐसा संकल्प दोहराया गया।








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