
खेरवाड़ा,(धरणेन्द्र जैन )। ऋषभदेव में प्राचार्य-प्रधानाध्यापक वाकपीठ के दूसरे दिन समापन समारोह मे डॉ. दयाराम परमार पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री एवं विधायक खेरवाडा ने कहा की शिक्षक चिंतन के साथ साथ समस्याओ का समाधान भी स्वयं करना सीखे। जिम्मेदार लोगो को अपनी जिम्मेदारी समझनी होंगी। वाकपीठ के अध्यक्ष मोहन लाल मीणा और सचिव प्रकाश चंद्र भानावत ने बताया की समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ दयाराम परमार विधायक खेरवाडा, अध्यक्ष केसर देवी प्रधान, विशिष्ट अतिथि मनीष मीना प्रशासक ऋषभदेव, शंकर लाल मीणा उप प्रधान, भागचंद रेगर उपखण्ड अधिकारी, भूपेंद्र कुमार जैन पूर्व शिक्षा उपनिदेशक, जय प्रकाश वानावात पी सी सी सदस्य, सतीश गांधी ए सी बी ओ, आनंद कुमार मेहता ए सी बी ई ओ प्रथम, नाथु लाल सालवी ए सी बी ओ द्वितीय, शशिकांत डामोर आर पी रहे। साथ ही वार्ड पंच महावीर नागदा, दया प्रकाश पहाड़, अशोक लुनदिया, दशरथ मीणा, पूर्व प्राचार्य नरेंद्र कुमार किकावत आदि उपस्थित रहे। वाकपीठ प्रतिवेदन प्रकाश चंद्र भानावत ने प्रस्तुत किया। श्रेष्ठ परिणाम देने वाले प्राचार्य एवं प्रधानाध्यापक का स्वागत किया गया। सेवानिवृत होने वाले नाहर सिंह मीणा प्राचार्य, योगेंद्र गांधी प्राचार्य, पुरुषोत्तम गामोठ का भी स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन संतोष कुमार व्यास एवं सचिन जैन द्वारा किया गया। वाकपीठ प्रारम्भिक की नवीन कार्यकारिणी गठित की गई जिसमे अध्यक्ष देवीलाल तेली, सचिव विजेंद्र हीरात तथा कोषांध्यक्ष धुलेश्वर मीणा को मनोनीत किया गया। वही वाकपीठ माध्यमिक मे अध्यक्ष मोहन लाल मीणा, सचिव रेणुका थ्योप्लस तथा कोषांध्यक्ष लक्ष्मन अहारी को मनोनीत किया गया। अंत मे धन्यवाद चुन्नीलाल कलाल वाकपीठ प्रारंभिक सचिव द्वारा दिया गया। द्वितीय दिवस पर विभिन्न विषयों पर वार्ताए भी प्रस्तुत की गई। प्रातःकालीन सत्र मे प्रमुख वार्ताकार प्रदीप कुमावत निदेशक आलोक संस्थान उदयपुर द्वारा विद्यालय मे तनाव मुक्त वातावरण का निर्माण कैसे करें, उक्त विषय पर अपनी वार्ता प्रस्तुत की।







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