
खैरवाड़ा (धरणेन्द्र जैन)। श्री राम मंदिर खेरवाड़ा के खचाखच भरे हुए सत्संग सभागार में गाजियाबाद के प्रसिद्ध कथा वाचक श्री वीरेंद्र शास्त्री ने कथा के आठवें दिन धनुष भंग एवं राम विवाह का रोचक वर्णन किया। दिव्य राम कथा के प्रवक्ता जगदीश व्यास के अनुसार श्री शास्त्री ने कहा कि राम कुल्हाड़ी रूपी है जो वृक्ष रुपी पापों को नष्ट कर देते हैं। राम शक्ति है और जानकी भक्ति है ।पांच प्राण है, प्राण अपान समान उदान व्यान । पांच तत्व, है पृथ्वी जल अग्नि वायु आकाश। पंच देवता है शिव गणेश सूर्य विष्णु दुर्गा। पंचेेंद्रीय है, कान नाक त्वचा आंख जीभ। राम कथा के अनुसार महर्षि विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को जनक के दरबार में ले जाते हैं और वहां धनुष यज्ञ में राम शिव धनुष को तोड़ देते हैं और सीता उनके गले में वरमाला डालती हैं । तत्पश्चात राजा जनक अयोध्या में निमंत्रण भेजते हैं। राजा दशरथ बरात सहित जनक के दरबार में आते हैं और राजा जनक ने अपनी जानकी के साथ साथ भरत लक्ष्मण और शत्रुघ्न के साथ भी अपनी पुत्रियों का विवाह कर दिया। दशरथ वापस अयोध्या आते हैं अयोध्या में पूरी रोशनी की जाती है चारों भाइयों की पत्नियों के साथ उनका सम्मान किया जाता है और आदरपूर्वक महल प्रवेश दिया जाता है ।”राम की निकली सवारी “का रोचक भजन गाया गया जिससे सभी भाव विभोर हो गये।
दिव्या राम कथा के अंत में श्री बजरंग अग्रवाल श्री गणेश लाल कलाल ने चरणों दक करके महा आरती की तथा श्री लव शीतलानी ने पुष्प वृष्टि की। महाआरती के पश्चात कथा का विसर्जन हुआ अंत में महाप्रसाद वितरण किया गया ।







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