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अदभुत नजारा सैकड़ों लोगो की आंखे ही नाम ‘निर्माण से निर्वाण’ तक

टोंक की धरा पर उपस्थित जैन समुदाय कह उठा जय हो वर्धमान सागर महाराज
      
खैरवाड़ा (धरणेन्द्र जैन)। टोंक की पावन वसुंधरा  पर विराजमान वात्सल्य वारिधि परम पूज्य आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज जिनकी दूर दृष्टि आज टोंक की भूमि पर सभी ने अपने आंखों से देखी व कानों से सुनी। जैन धर्म प्रचारक पवन कंटान एवं विमल जौंला ने बताया कि राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी  पारस जैन “पार्श्वमणि” पत्रकार कोटा को जानकारी देते हुवे बताया कि पंचम काल मे भी ऐसे अद्भुत और विरले संत विराजमान है जो आने वाले भविष्य को पहले ही जान लेते हैं। आज दिगंबर जैन रसिया हमीरगंज में सभी ने एक स्वर से कहा की जय हो आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज जो जीवंत चमत्कार के पुंज हैं वाक्य था, क्षुल्लक श्री विशाल सागर जी महाराज को मुनि दीक्षा देने का। जैन पत्रकारों की गोष्ठी शांति समागम के नाम से चल रही थी कि तभी  आचार्य भगवान ने जान लिया कि एक संत निर्वाण को प्राप्त होने वाले हैं और आनन फानन में उन्होंने मुनि दीक्षा प्रदान कर मुनि विशाल सागर महाराज नामकरण किया। चमत्कार तब हुआ जब दीक्षा बड़ी समता भाव के साथ संपन्न हुई उपस्थित जन समुदाय ने अपनी आंखों से केश लोंच करते हुए नवदीक्षार्थी महाराज को देखा और कोई भी यह नहीं कह सकता था कि आने वाले क्षण में ही उनकी समाधि हो जाएगी। दीक्षा के मात्र 15 मिनट पश्चात ही मुनि विशाल सागर महाराज समता पूर्वक समाधि मरण को प्राप्त हुए। धन्य है ऐसे चमत्कारी दिव्य संत जो आज इस कलयुग में ही विराजमान है। राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन “पार्श्वमणि”   ने स्वयं उपस्थित होकर इस आयोजन में पुण्य का संचय किया।

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