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वल्लभनगर में एडीजे एवं एनआई एक्ट कोर्ट की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने किया न्यायिक कार्यों का बहिष्कार

वल्लभनगर में अधिवक्ताओं ने किया न्यायिक कार्यों का बहिष्कार, शीतला माता मंदिर चोरी प्रकरण में खुलासे की मांग

वल्लभनगर, (कन्हैयालाल मेनारिया बासड़ा)07 जुलाई : मेवाड़ के प्रसिद्ध शक्तिपीठ शीतला माता मंदिर में लाखों रुपये के जेवर चोरी के मामले में अभी तक कोई खुलासा नहीं होने से नाराज अधिवक्ताओं ने सोमवार को वल्लभनगर में न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया। बार एसोसिएशन वल्लभनगर के तत्वावधान में अधिवक्ताओं ने बार अध्यक्ष रमेश चंद्र सांगावत के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन कर पुलिस प्रशासन से जल्द खुलासा करने की मांग की।
          अधिवक्ताओं ने निर्णय लिया कि इस प्रकरण में वे अभियुक्तों की कोई भी पैरवी नहीं करेंगे। साथ ही अधिवक्ताओं पर हो रहे हमलों को लेकर सुरक्षा प्रदान करने की मांग भी प्रशासन से की गई। बार अध्यक्ष रमेश चंद्र सांगावत ने बताया कि प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर से लाखों रुपये के आभूषण चोरी हुए 7 दिन बीतने के बावजूद पुलिस अभी तक खाली हाथ है। ना तो कोई सुराग मिला है, और ना ही किसी की गिरफ्तारी हुई है। अधिवक्ताओं का एक दल वल्लभनगर थाने पहुंचा और जांच अधिकारी दिनेश पाटीदार से मिलकर प्रकरण की जांच में तेजी लाने व शीघ्र खुलासा करने की मांग की। तत्पश्चात थाने से सभी अधिवक्ता शीतला माताजी पहुंच माता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

वल्लभनगर में एडीजे व एनआई कोर्ट की मांग

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने वल्लभनगर में एडीजे (एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज) न्यायालय और एनआई एक्ट (नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट) कोर्ट की स्थापना की मांग को लेकर नारेबाजी की। बार महासचिव बाबूलाल डांगी ने कहा कि एनआई कोर्ट की स्थापना से चेक बाउंस के प्रकरणों की सुनवाई तेजी से हो सकेगी और पक्षकारों को समय पर न्याय मिलेगा।
उन्होंने उदयपुर में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने की भी पुरजोर मांग की। अधिवक्ताओं ने कहा कि जोधपुर हाईकोर्ट की दूरी के कारण दक्षिण राजस्थान के निवासियों को न्याय मिलने में विलंब होता है। यदि उदयपुर में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित होती है, तो क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

बहिष्कार से न्यायालयीन कार्य प्रभावित

सोमवार को न्यायिक कार्य बहिष्कार के चलते वरिष्ठ सिविल न्यायालय और राजस्व अदालत में सुनवाई प्रभावित रही। इस मौके पर बार अध्यक्ष रमेश चंद्र सांगावत, डालचंद पोखरना, रमेशचंद्र बडाला, फतेहलाल गाडरी, श्रवण कुमार पोखरना, दुर्गेश मेनारिया, कन्हैयालाल डांगी, शान्तिलाल डांगी (उपाध्यक्ष), बाबूलाल डांगी (महासचिव), गजेंद्रकुमार ओस्तवाल, योगेंद्र माली (वित्त सचिव), नारायण गाडरी, मुकेश गोपावत, अभिमन्यु जाट, शरीफ मोहम्मद, दिनेश डांगी, भेरुलाल रावत (सचिव), कैलाश मेघवाल, लहरीलाल डांगी, नारायण डांगी, चंद्रप्रकाश मेघवाल, भगवान मेनारिया, सुरेश चंद्र मेनारिया सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।

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