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सीरियल किलर मानसिक शांति के लिए करता था हत्या

✍️कांतिलाल मांडोत की कलम से…

सीरियल किलर मानसिक शांति के लिए करता था हत्या
इस संसार मे मनुष्य के रूप और दागदार जीवन शैली की परख करना आसान नही है। कुकर्म और हैवानियत भरा कृत्य इंसान को सोचने के लिए मजबूर कर देता है।भगवान के बाद डॉक्टर पर भरोसा करने वाले समाज मे ऐसे कुकृत्य हो रहे है,जिसकी कल्पना मात्र से रोंगटे खड़े हो जाते है।इंसान हैवान बनता जा रहा है। समाज मे रिश्ते नातो पर मनुष्य विश्वास करने के लिए तैयार नही है। हर सुबह गलत सोच और मन मे पलने वाले कीड़े को कौन जान सकता है। एक ऐसी ही घटना प्रकाश में आई है। जिसमे विकृत सोच वाले शख्श ने किडनी निकाल कर बेचने और टेक्षी चालक की हत्या कर उनकी टेक्षी बेचने वाला सिरियल किलर डॉ देवेंद्र शर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।उसको प्रवचन सभा मे प्रवचन देते वक्त गिरफ्तार किया गया।इंसान के नाम पर काला कलंक समान डॉ देवेंद्र शर्मा को हत्या करने में मजा आता था।नेक्स टू गॉड की महिमा का गुणगान गाने वाली भोलीभाली जनता के साथ इतना बड़ा विश्वासघात करने वाले इस राक्षस का कौन भरोसा कर सकता है।डॉक्टर के पद को गौरव से महामंडित करने वाली समाज को अब ऐसे लपट स्वामी  पर भरोसा करना नागवार गुजरा। राजस्थान के दौसा में पकड़े गए देवेंद्र शर्मा पर सौ हत्या और 125 किडनी निकाल कर बेचने का आरोप है।यह इंसान किसी भी तरह इंसान कहलाने का अधिकारी नही है।समाज रूढ़िवादी परम्पराओ में उलझ कर रह गया है।इंसान के चेहरे पर मासूमियत दिखाई देती है,लेकिन उस मासूमियत के पीछे राक्षसी कृत्य छिपा हुआ है।भारत आध्यात्मिक और भगवान पर भरोसा करने वाला देश है।इस देश में भोलीभाली जनता फरेबी और दुष्ट लोगो को पहचान पाने की  समझ नही है।जिसका ये लोग भरपूर फायदा उठाते है।प्रवचन और सभाओं में अपने नाम का डंका बजाने वाले के चेहरे के पीछे दूसरा चेहरा लगा होता है।लेकिन इंसान की शुद्ध भावना हर इंसान को धोखे में रखकर अपने स्वार्थ के खातिर हत्या तक  की घटना आकार ले लेती है।डॉ देवेंद्र शर्मा तिहाड़ जेल से पैरोल पर छूटकर राजस्थान के दौसा जिले में आश्रम में पुजारी बनकर रह रहा था।डॉ डेथ 2004 में दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा था।जयपुर में दो लैंडलाइन कॉल के जरिये सीरियल किलर  देवेंद्र शर्मा पुलिस के हत्थे चढ़ा।देवेंद्र ने सच उगलते ही पुलिस के होंश ठिकाने आ गए।चार राज्यो में टेक्षी चालको की हत्या कर शव मगरमच्छों को डाल दिये ।सीरियल किलर ने पुलिस की पूछताछ में दो साल में सौ हत्या करने की बात कबुली थी।इस तरह के इंसान के भेष में जानवर है ।ये इंसान तो क्या हैवान कहलाने के काबिल नही है।पौराणिक काल के राक्षस भी ऐसी दर्दनाक मौत नही देते थे।बदलते परिवेश और समय पर हर एक इंसान को परखने की शक्ति होनी अति आवश्यक है।पग पग पर पाप से भरे इंसानों को पहचानना मुश्किल होता जा रहा है।ये समाज पर काला धब्बा है।इतनी हत्या इतनी सफाई से की गई है कि वो पुलिस से बचता रहा। इस राक्षस ने पुलिस को बताया कि पहले वह टेक्षी बुक करता था और चालक की हत्या कर टेक्षी गैंग को बेच देता था।फांसी और उम्रकैद काटने के लिए तिहाड़ जेल में था।बांदीकुई में डायग्नोस्टिक के नाम से क्लिनिक चलाने वाले इस शातिर ने कई ऐसे कारनामे किये है।जिसका तालुक सीधा इस केस से है।शातिर बदमाश पुलिस की पकड़ में आने पर नई कहानी बनाकर प्रशासन को गुमराह करता है।लेकिन अब इस शातिर का समय खत्म हो गया है।इस हार्डकोर शातिर हत्यारे को फांसी तो होगी।परन्तु इस तरह से अमानुषिक कृत्य करने वाले युवक समाज मे दूसरे नही बन पाए,,उसके लिए धर्म का पुष्ट देना अनिवार्य है।शिक्षा के साथ धर्म की शिक्षा हर इंसान को मिलनी ही चाहिये।
        

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