
भीलवाड़ा कलेक्टर को सुप्रीम कोर्ट के आदेशो पर जालिया गाव में अरावली श्रंखला पर अवैध ब्लास्टिंग व खनन को तत्काल बंद की गुहार
भीलवाड़ा , (जय प्रकाश शर्मा),बनेड़ा !पर्यावरणीय एवं आजीविका संबंधी बढ़ते खतरे के बीच न्याय की व्यथा में डूबे जालिया गांव के परेशान किसानों ने जिला कलेक्टर को एक भावुक पत्र लिखकर जिंदल शा लिमिटेड द्वारा अवैध ब्लास्टिंग एवं खनन कार्यों को तत्काल रोकने की मांग की है।
किसानो का विगत छह महीने से चला आ रहा यह धरना अब 187वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिसमें सुरक्षा नियमों का उल्लंघन, टूटे हुए समझौते एवं दो दिन पहले ही जारी सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्देश का उल्लेख किया जा रहा है। शीर्ष अदालत ने अरावली की नाजुक पारिस्थितियो की रक्षा के लिए 21 जनवरी 2026 तक इस क्षेत्र में सभी खनन एवं ब्लास्टिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है।
बुधवार को लिखे अपने पत्र में किसान अपनी जीवन-मरण की स्थिति का मार्मिक चित्रण करते हुए लिखते हैं, “जिला कलेक्टर आदेश पर एडीएम सिटी की अध्यक्षता में 23 दिसंबर को बैठक आयोजित की गई थी, फिर भी हमारी स्थिति जस की तस बनी हुई है।” जिंदल की खनन गतिविधियां अरावली श्रृंखला में हो रही हैं, जिसे किसान खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) के मानदंडों एवं सुप्रीम कोर्ट के आदेश का घोर उल्लंघन बताते हैं। जालिया की पहाड़ियां इस संरक्षित क्षेत्र में आती हैं, फिर भी कार्य जारी हैं, जो 500 मीटर के खतरे वाले दायरे में तीन पूरे गांवों, तीन स्कूलों, मेजा डैम की नहर (तीन दिशाओं में 100 मीटर के दायरे में) एवं कई आबादी के घर (150-200 मीटर कि दूरी) पर हे जो की कभी भी जन हानी हो सक्ती हैं।
डीजीएमएस की अनुमति पत्र (दिनांक 23 अक्टूबर 2024)—जिसे हालिया बैठक में खनिज अभियंता महेश शर्मा ने पढ़ा—स्पष्ट रूप से ड्रिल चौड़ाई को 34 एमएम तक सीमित करता है एवं 500 मीटर के “खतरे वाले क्षेत्र” में कोई मकान स्ट्रक्चर किसी संरचना, व्यक्ति या मार्ग न होने का आदेश देता है। “जिंदल पूर्ण अनुपालन का दावा करता है, लेकिन तथ्य इसके उलट चीख-चीखकर बयान कर रहे हैं,”की 500 मीटर में तिन गांव की पूरी आबादी आती हे और तीनो गावो के मंदिर स्कूल आम रास्ता आता DGMS के आदेशा अनुसार लापिया पॉइंट पर ब्लास्टिंग एव खनन होना सम्भव ही नहीं हे जीसे गावो में भरी नुकसान हो रहा हे पत्र में कहा गया है, जिसमें कंपनी पर अवैध ब्लास्टिंग से घरों एवं स्कूलों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।
“जालिया (महुआ खुर्द ) के प्रताड़ित किसानों” द्वारा हस्ताक्षरित पत्र, 4 जनवरी 2025 के लिखित समझौते के टूटे वादों की एक लंबी सूची प्रस्तुत करता है, जिसका साक्ष्य तत्कालीन एएसपी पारस जैन एवं एडीएम ओ.पी. मेहरा ने दिया था:
• मुकदमों की वापसी न होना: समझौते के बिंदु 8 के अनुसार प्रदर्शनकारियों पर लगे एफआईआर तत्काल वापस लिए जाने थे। अधिकारियों ने राज्य सरकार को बंदी के लिए पत्र भेजने का वादा किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
• चारागाह संकट: स्थानीय चरागाहों को खनन स्थल में बदल दिए जाने से पशुओं को 60 किलोमीटर दूर चारा लाने पड़ रहा है, जिससे भूख से बड़े पैमाने पर पशुओं की मौत हो रही है। किसान गांव में ही सामुदायिक चारागाह बहाल करने की मांग करते हैं।
• नौकरी में धोखा: पूर्व खंड (बिंदु 3) में स्थानीय लोगों को 40 स्थायी नौकरियां देने का वादा था; कंपनी में अब केवल कोन्टैक्ट बेस पर अड़ रही है, जिससे ग्रामीणों का विश्वास टूट रहा है।
• मुआवजे में कमी: 2016-2024 का बकाया मुआवजा ₹2,500 प्रति बीघा तय हुआ था, लेकिन जिंदल अब ₹1,500 का हवाला दे रही है—जो बैठक मिनट्स में दर्ज है—यह स्पष्ट शोषण है। नया मासिक मुआवजा (बिंदु 1 के तहत ₹2,500 प्रति बीघा) केवल जनवरी एवं फरवरी 2025 के लिए ठेकेदार के माध्यम से दिया गया, उसके बाद बंद। सीधे किसान खातों में हस्तांतरण का समझौता था, लेकिन कंपनी झूठ बोलकर प्रशासन एवं किसानों को गुमराह कर रही है, जिससे गांव में कलह फैल रही है।
• ठेकेदार हटाने में देरी: अगस्त 2025 से (बिंदु 2) बाहरी ठेकेदार को हटाकर स्थानीय प्रबंधन सौंपने का प्रावधान था, लेकिन देरी हो रही है, जिससे कंपनी , झूठी शपथ-पत्र एवं असामाजिक तत्वों के जरिए आंतरिक झगड़े भड़का रही है।
• चारा एवं नुकसान के वादे भूले: दैनिक 2 टन हरा घास देने का समझौता टूट गया है, तथा ब्लास्टिंग से क्षतिग्रस्त घरों की मरम्मत या मुआवजा (बिंदु 5) अनदेखा कर दिया गया है, कंपनी अपने ही दावों को “झूठा” बताकर किसानों का शोषण कर रही है।
पत्र में जिंदल पर “प्रशासन एवं ग्रामीणों को गुमराह करने” का आरोप लगाते हुए कलेक्टर से समझौते को कड़ाई से लागू करने, ठेकेदार को हटाने एवं शांति बहाल करने की अपील की गई है। प्रताड़ित किसान प्रतिनिधि कन्हैया लाल माली ने बताया कि गाव के किसानों चेतावनी दी अगर प्रशासन जालिया गाव के किसानो व जालिया में अरावली श्रखला में हो रहे अवैध खनन एव ब्लास्टिंग को अनदेखा किया तो धरना दे रहेे। ग्रामीण किसान जयपुर में विधानसभा के बहार आत्मदाह करेंगे जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन व राजस्थान सरकार की होगी।








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