Home » भींडर » राणेरा महादेव शिवधाम में शिव-पार्वती विवाह महोत्सव की भावविभोर प्रस्तुति, ठाकुरजी व महादेव जी को छप्पन भोग धराया

राणेरा महादेव शिवधाम में शिव-पार्वती विवाह महोत्सव की भावविभोर प्रस्तुति, ठाकुरजी व महादेव जी को छप्पन भोग धराया

मनुष्य का वास्तविक धर्म उसके कर्म और आचरण में निहित होता है : पं. वासुदेवकृष्ण

वल्लभनगर, (कन्हैया लाल मेनारिया)!मेनार क्षेत्र का प्रमुख आस्था केंद्र राणेरा महादेव शिवधाम, नांदोली खुर्द में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्री शिव महापुराण कथा का भव्य, दिव्य एवं भक्तिमय आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ अपने अंतिम चरण में पहुँच गया है। इस पावन अवसर पर माँ नर्मदा तट धामनोद (मध्यप्रदेश) से पधारे सुप्रसिद्ध कथा वाचक पं. वासुदेवकृष्ण महाराज के श्रीमुख से शिव महापुराण की अमृतमयी कथा का रसपान कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा के दौरान अखिल भारतीय मेनारिया ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज पानेरी पहुंचे, जिनका रोहिड़ा ग्रामवासियों द्वारा सम्मान किया गया। साथ ही रोहिड़ा ग्रामवासियो मोहनलाल, राधेश्याम, लक्ष्मीलाल एवं शिवशंकर जोशी एवं परिवार द्वारा ठाकुरजी व महादेव जी को छप्पन भोग धराया।
               संगीतमय श्री शिव महापुराण कथा के दौरान कथा वाचक प. वासुदेव कृष्ण ने प्रवचनों के माध्यम से व्यक्ति के जीवन में अच्छे आचरण, संयम और सत्य के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कथा वाचक ने कहा कि मनुष्य का वास्तविक धर्म उसके कर्म और आचरण में निहित होता है, केवल बाहरी आडंबर से जीवन सफल नहीं बनता।
               कथा के सातवें दिन पं. वासुदेवकृष्ण महाराज ने भगवान शिव एवं माता पार्वती के दिव्य विवाह महोत्सव का अत्यंत भावपूर्ण, सारगर्भित एवं प्रेरणादायी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया और यह विवाह केवल दो आत्माओं का नहीं, बल्कि वैराग्य और गृहस्थ जीवन के संतुलन का दिव्य संदेश देता है। शिव-पार्वती विवाह प्रसंग के दौरान शिव बारात, देवताओं का आगमन, माता पार्वती का श्रृंगार एवं विवाह उत्सव का सजीव वर्णन सुन श्रद्धालु भावनाओं में डूब गए। कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों एवं संगीतमय झांकियों ने वातावरण को पूरी तरह शिवमय बना दिया। हर-हर महादेव के जयकारों से संपूर्ण शिवधाम गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए।
           कथा वाचक प. वासुदेव कृष्ण ने बताया कि भगवान शिव का जीवन त्याग, सरलता और करुणा का प्रतीक है। शिव महापुराण हमें सिखाता है कि सत्य, अहिंसा, क्षमा, सेवा भाव और परोपकार जैसे गुणों को अपनाकर ही व्यक्ति समाज में सम्मान और आत्मिक शांति प्राप्त कर सकता है। कथा के दौरान यह भी कहा गया कि क्रोध, लोभ, अहंकार और ईर्ष्या जैसे अवगुण मानव जीवन को पतन की ओर ले जाते हैं, जबकि सदाचार मनुष्य को उन्नति के मार्ग पर अग्रसर करता है। कथा वाचक ने आगे कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यवहार में विनम्रता, परिवार व समाज के प्रति कर्तव्यबोध तथा ईश्वर भक्ति को स्थान देना चाहिए। जब मनुष्य अपने जीवन में अच्छे संस्कारों को अपनाता है, तभी उसका जीवन सार्थक बनता है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन आता है। कथा समापन के पश्चात् विधिवत महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसके बाद सभी भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया। कथा श्रवण हेतु रोहिड़ा सहित आसपास के कई गांवों से सैकड़ों श्रद्धालु शिवधाम पहुँचे, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिमय वातावरण से ओत-प्रोत हो गया।

Leave a Comment

Modi 3.0 के पहले आम बजट से मिडिल क्लास को मिलेगी राहत?