
वल्लभनगर,(कन्हैया लाल मेनारिया बासड़ा)!विश्व आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय खेरोदा के विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। उक्त आयोजन स्थानीय विद्यालय, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, राजस्थान वन विभाग उदयपुर उत्तर के सहयोग से मेनार खेरोदा रामसर स्थल के मद्देनज़र किया गया। अलसूबह प्रथम सत्र में विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में व्याख्याता एवं पक्षी विशेषज्ञ दर्शन मेनारिया ने बताया कि आर्द्रभूमि स्वच्छ जल प्रदान करती है, बाढ़ के प्रभाव को कम करती है, और कार्बन को स्टोर कर जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद करती है। इस वर्ष इस दिवस की थीम”आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाना” है।विश्व आर्द्रभूमि दिवस के बारे में जानकारी देते हुए इनके महत्त्व से अवगत कराया साथ ही रामसर कन्वेंशन एवं रामसर स्थलों के बारे में जानकारी दी गई। उल्लेखनीय है कि मेनार के ब्रह्म तालाब, ढंढ तालाब एवं खेरोदा के दुदेला तालाब क्षेत्र को शामिल करते हुए अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के रामसर स्थल कि घोषणा 2025 में कि गई थी जो कि उन जलाशयों के परिस्थितिकी महत्त्व को दर्शाता है। पक्षी संरक्षण एवं वेटलैंड संरक्षण में स्थानीय समुदाय एवं स्कूली विद्यार्थियों की भूमिका को इंगित किया गया। विद्यालय के जूनियर कक्षाओं के बालकों हेतु चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन करते हुए पक्षी संरक्षण एवं प्राकृतिक आवासों के संरक्षण का आव्हान किया गया। तत्पश्चात दिन के द्वितीय सत्र में विद्यालय के लगभग 110 से अधिक विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा विद्यालय परिसर से दुधेला तालाब तक 2 किलोमीटर की वेटलैंड वॉक की गई जिसमें जलाशयों एवं इससे जुडी जैव विविधता के संरक्षण में स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक विचारधारा की क्या भूमिका होती है इससे जुड़े नारे लगाते हुए विद्यार्थी तालाब पर पहुंचे,वहां पहुंच कर पक्षी दर्शन गतिविधि आयोजित हुई। स्पॉटिंग स्कोप और बाइनो क्यूलर्स से ग्रेट क्रेस्टेड ग्रिब, टफ्टेड डक, कॉमन पोचार्ड, यूरेशियन कूट, रेड नेप्ड आईबीस, ग्लोसी आईबीस सहित कई प्रजातियों के पक्षियों को जलाशय में भोजन तलाशते अथवा आराम करते हुए निहारा। उप प्रधानाचार्य चंद्र प्रकाश आचार्य,व्याख्याता, अंजलि मीणा, प्रिया रजक, रघुनाथ सिंह राठौड़,वरिष्ठ अध्यापक राजू कस्वां,नवीन भट्ट, आई टी विशेषज्ञ रोहित मेनारिया, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अरुण सोनी ने भी विद्यार्थियों को जलाशयों की भूमिका एवं महत्व के बारे में बतया। यहां पिक्चर कार्ड द्वारा विद्यार्थियों को विभिन्न पक्षियों की जानकारी दी गई जलाशयों के द्वारा अंडरग्राउंड वॉटर रिचार्ज के बारे में बताया गया। उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष 2 फरवरी को वेटलैंड डे के रूप में मनाया जाता है। जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों और हमारे ग्रह के लिए वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में ‘रामसर कन्वेंशन’ (आर्द्रभूमि पर सम्मेलन) अपनाए जाने की याद दिलाता है।यह दिवस 1997 में मनाया गया था। यह दिन हमें याद दिलाता है कि आर्द्रभूमि, जैसे कि झीलें, दलदल, और मैंग्रोव, न केवल हमारे लिए, बल्कि पृथ्वी के स्वास्थ्य के लिए भी अपरिहार्य हैं।








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