
कक्षा 12 तक अध्ययन करना होगा अनिवार्य।
प्रीवेडिंग, आर्केस्ट्रा कार्यक्रमों पर पूर्णतः पाबंदी।
वल्लभनगर , (कन्हैया लाल मेनारिया बासड़ा)!सकल प्रजापति समाज चोखला भींडर द्वारा नव निर्मित भवन में समाज के वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया गया।
भागीरथ प्रजापति एवं दिनेशचंद्र कुंभकार द्वारा गणपति वंदना, राम नाम जाप, हनुमान चालीसा के साथ माँ श्री श्रीयादेवी की आरती के पश्चात समाज के अध्यक्ष भभूतलाल प्रजापति की अध्यक्षता में सभा का शुभारंभ किया गया एवं अध्यक्ष ने सभी समाज जनों का स्वागत किया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए करकें के प्रथम सत्र में कृष्णार्जन पार्थभक्ति ने समाज के युवाओ को समाज विकास में योगदान हेतु अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया जिसमे कोटा से विजय कुमार, भगवानलाल, जसवंत, धीरज, मदनलाल, भभूतलाल, नाथूलाल, प्रेमशंकर, रामेश्वरलाल, जगदीश, दिनेश,
आदि ने अपने क्रमश: शिक्षा, खेल, रोजगार, वार्षिक पत्रिका का प्रकाशन, समाज की वेबसाइट, सामूहिक विवाह, धार्मिक आयोजनों में ड्रेसकोड, करियर काउंसलिंग सहित सेव अरावली, सनातन संस्कृति का प्रचार आदि विषयों पर भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में श्रीयादे प्रजापति समाज सेवा समिति के अध्यक्ष कैलाश चंद्र जाजपुरा ने वार्षिक प्रतिवेदन पेश करते हुए अपने विचार रखे
उन्होंने बताया कि छोटे छोटे कदम ही समाज को बड़ा बनाते है, हम सब मिलकर समाज को अग्रसर करेंगे लेकिन उसके लिए जरूरी है समय समय पर छोटे छोटे कदम निरंतर आगे बढ़ाये जाए।
समिति के सचिव तुलसीराम प्रजापति ने बताया ने बताया कि सम्मेलन में 400 से ज़्यादा समाज जन उपस्थित हुए, अपने विचार रखते हुए उन्होंने समाज के युवाओ को अधिक बढ़ चढ़कर योगदान करने के लिए प्रोत्साहित किया।
कोषाध्यक्ष दिनेशचंद्र कुंभकार ने वित्तीय वर्ष का हिसाब पेश किया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में सकल प्रजापति समाज चोखला के कोषाध्यक्ष देवीलाल प्रजापति ने उपरोक्त सुझावो का संक्षिप्तिकरण करते हुए अध्यक्ष एवं पंचों की सहमति से समाज सुधार के कई नियम पारित किए जिसमे समाज को महंगाई से राहत देते हुए शादी ब्याह में चढ़ाई जाने वाली रकम को 5 तोला सोना से कम कर 3 तोला कर दिया। समाज के बच्चों का कम से कम 12वी कक्षा तक का अध्ययन अनिवार्य कर दिया गया। वर्ष में एक बार सामूहिक विवाह, करियर काउंसलिंग सेमिनार अनिवार्य कर दिया गया। आने वाली 20 जनवरी 2026 को कुलदेवी माँ श्रीयादेवी जन्मोत्सव मनाना तय हुआ एवं नव निर्मित भवन का उद्घाटन भी इसी दिन करना तय किया गया।
प्रीवेडिंग और आर्केस्ट्रा कार्यक्रमों पर पूर्णतः पाबंदी लगाई गई।
कार्यक्रम के अंत में पार्थभक्ति द्वारा ऑनलाइन प्राप्त हुए सुझावो को पटल पर रखा गया तत्पश्चात सभी का भोजन प्रसादी कर आभार प्रकट किया गया।








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