


मार्गशीर्ष अमावस्या पर मेनार में झलकी भक्ति की अनूठी छटा, ठाकुरजी को धराया गया सामूहिक छप्पन भोग
भजन–कीर्तन से गुंजा ओंकारेश्वर चौक स्थित प्राचीन मंदिर परिसर
वल्लभनगर,(कन्हैया लाल मेनारिया बासड़ा)। सनातन धर्म में मार्गशीर्ष मास का विशेष महत्व माना जाता है। इसी पावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिव्य अवसर पर गुरुवार को विशाखा नक्षत्र योग में मेहतागढ़ मेनार के ओंकारेश्वर चौक स्थित प्राचीन ठाकुरजी मंदिर में भक्तिभाव की अनुपम छटा देखने को मिली। दिनभर जय श्री ठाकुरजी के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहा और ठाकुरजी को सामूहिक छप्पन भोग का मनोरथ बड़े हर्षोल्लास एवं श्रद्धा से संपन्न हुआ।
स्वर्ण मुकुट व पुष्प श्रृंगार से अलौकिक हुए ठाकुरजी के दर्शन
सुबह प्रातःकाल भगवान ठाकुरजी का पंचामृत से अभिषेक कर दिव्य स्नान कराया गया। उसके पश्चात स्वर्ण मुकुट धारण करवाकर ठाकुरजी का विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर परिसर मोगरा, कश्मीरी गुलाब, देशी गुलाब तथा विविध पुष्पों की सुगंध से महक उठा।
पुजारी जगदीश वैष्णव द्वारा ठाकुरजी को खाटूश्यामजी की परंपरा पर आधारित भव्य पुष्प-श्रृंगार से अलंकृत किया गया। स्वर्ण आभूषणों से सुशोभित ठाकुरजी के दिव्य स्वरूप पर भक्तों की दृष्टि टिकती ही रह गई। संवलियाजी से मंगाई गई गुल दाउदी एवं गुलाब के ताज़ा फूलों से मंदिर परिसर में अद्भुत आभा छाई रही।
पूर्व उपसरपंच परिवार ने लिया छप्पन भोग का लाभ
इस पुण्य महोत्सव का लाभ पूर्व उपसरपंच शंकरलाल मेरावत, सुरेश मेरावत की पुत्री पूजा मेनारिया (पत्नी नरेश भट्ट, रुंडेडा) तथा परिवार द्वारा श्रद्धाभाव से प्राप्त किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता हुक्मीचंद सांगावत ने बताया कि मेनार की बेटी पूजा मेनारिया ने पूर्ण आस्था से ठाकुरजी को छप्पन भोग समर्पित कर वागा धराने का सौभाग्य पाया, जो परिवार के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।
चौतरफा रोशनी में नहाया मंदिर, हजारों भक्तों का उमड़ा सैलाब
मंदिर को दुधिया रोशनियों एवं पुष्पमालाओं से सजाया गया। दिनभर दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा। शाम 4.30 बजे भगवान को राजभोग रूप में 56 प्रकार के व्यंजनों मिष्ठान, फलाहार, सूखे मेवे, विशेष पर्व प्रसादों सहित समर्पित किए गए। छप्पन भोग अर्पण के बाद हुई महा आरती के दौरान वातावरण भक्ति के रंग में रंग गया। महिलाएँ व युवक भजन-नृत्य में थिरकते नजर आए। महाआरती के पश्चात प्रसाद वितरण हुआ।
भजन–कीर्तन से गुंजा मंदिर प्रांगण
छप्पन भोग से पहले आयोजित भजन संध्या में श्रद्धालु झूम उठे। मोती चमके चमके, पचरंगी या पाग, श्याम थे आछ्या बिराज्या, मेनार मायने, थाने सोवणा-सोवणा, झुलनी पे सेठ सांवरो झुलवा ने जावे सा जैसे भजनों पर भक्तों ने आनंदपूर्वक नृत्य किया। राधा–श्याम के स्वरूप का वर्णन करते भजनों ने हर हृदय में भक्ति–रस भर दिया।
आसपास के गाँवों से पहुंचे श्रद्धालु
मेनार, रुंडेडा, खरसाण, वाना, बांसड़ा, खेरोदा, बाठरड़ा खुर्द, मावली डांगीयान, इंटाली सहित विभिन्न गाँवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएँ एवं युवा इस महोत्सव में शामिल हुए। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में गणपतलाल मेनारिया (निदेशक, राणा प्रताप संस्थान) भंवरलाल भट्ट (भाजपा), महावीर वया, सोहनलाल हरजोत, रमेश हरजोत सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।








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