
उदयपुर | जनमत मंच के तत्वाधान में हनुमान जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर लघु परि चर्चा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ.श्रीनिवास महावर ने बताया कि हनुमान जयंती, हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पवित्र त्योहार है। यह पर्व भगवान श्रीराम के परम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। हनुमान जयंती चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस दिन देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। हनुमान जी को शक्ति, भक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है।
हनुमान जयंती केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें निष्ठा, सेवा और समर्पण का संदेश भी देती है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी के जन्मस्थान को लेकर भिन्न-भिन्न मान्यताएं हैं, प्रथम मान्यता के अनुसार उनका जन्म अंजनाद्री पर्वत (कर्नाटक) माना जाता है, जो हम्पी (किष्किंधा) के पास स्थित है। दूसरी मान्यतानुसार उनका जन्म महाराष्ट्र के नाशिक जिले के अंजनेरी पर्वत और कुछ लोग झारखंड के गुमला जिले के ‘आंजन’ गांव को भी जन्मस्थली मानते हैं। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, हनुमान जी का जन्म सुमेरु पर्वत के समीप हुआ था। यह स्थान पौराणिक किष्किंधा का हिस्सा माना जाता है।
चैत्र मास की पूर्णिमा को मंगलवार के दिन, माता अंजना और केसरी के घर हुआ था। उन्हें पवनपुत्र भी कहा जाता है, क्योंकि वे वायु देव के आशीर्वाद से उत्पन्न हुए थे। हनुमान जी भगवान श्रीराम के परम भक्त थे। उन्होंने रामायण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने माता सीता की खोज की और लंका में जाकर अपनी वीरता का परिचय दिया। उनकी भक्ति और साहस के कारण उन्हें अमरत्व का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। हनुमान जयंती के दिन भक्तजन हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते हैं।
हनुमान जी को बल और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। वे अत्यंत शक्तिशाली होने के बावजूद विनम्र और सेवाभावी थे।
उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची शक्ति विनम्रता और सेवा में है। उन्होंने अपने जीवन में कभी अहंकार नहीं किया और सदैव भगवान श्रीराम की सेवा में लगे रहे।
उनकी निष्ठा और समर्पण हमें अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार रहने की प्रेरणा देता है।
हनुमान जयंती के दिन लोग सुबह स्नान करके व्रत रखते हैं और मंदिरों में जाकर पूजा करते हैं। हनुमान जी की प्रतिमा पर सिंदूर और चोला चढ़ाया जाता है।
मंदिरों में भजन-कीर्तन और हनुमान चालीसा का पाठ होता है। कई स्थानों पर शोभायात्राएँ भी निकाली जाती हैं।
भक्तजन प्रसाद के रूप में बूंदी, लड्डू और फल अर्पित करते हैं। इस दिन विशेष रूप से शक्ति और साहस की कामना की जाती है।
आज के समय में जब लोग तनाव और समस्याओं से घिरे रहते हैं, हनुमान जी की भक्ति हमें आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।
यह पर्व समाज में एकता और सद्भाव को भी बढ़ावा देता है।
हनुमान जयंती हमें सिखाती है कि हमें अपने जीवन में अनुशासन और समर्पण बनाए रखना चाहिए।
हनुमान जी की तरह हमें भी अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहना चाहिए और कठिनाइयों से नहीं घबराना चाहिए।
हमें अपने बड़ों का सम्मान करना चाहिए और सदैव सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए।
हनुमान जयंती शक्ति, भक्ति और साहस का पवित्र पर्व है। यह त्योहार हमें सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश देता है।
हमें हनुमान जी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए और समाज में प्रेम तथा सद्भाव बनाए रखना चाहिए। इस प्रकार, हनुमान जयंती भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण त्योहार है, जो हमें आत्मविश्वास और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर सहायक आचार्य आजाद मीणा ने बताया कि –
हनुमान जयंती पूरे भारत में दो बार बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। एक जयंती भगवान हनुमान के जन्म का प्रतीक है, जबकि दूसरी उनकी दुष्ट आत्माओं पर विजय का प्रतीक है । हनुमान भगवान शिव के अवतार और भगवान राम के परम भक्त हैंl
मंच के सचिव शिरीष नाथ माथुर ने बताया कि हनुमान जी के 12 नाम- हनुमान, अंजनीसुत, वायुपुत्र, महाबल, रामेष्ट, फाल्गुनसखा, पिंगाक्ष, अमितविक्रम, उदधिक्रमण, सीताशोकविनाशन, लक्ष्मणप्राणदाता और दशग्रीवदर्पहा है,जो अत्यंत चमत्कारी और प्रभावशाली माने जाते हैं। वर्त्तमान समय में इसे राष्टीर्य पर्व की तरह भारत एवं अन्य देशो में भी हर्षोउल्लास से मनाया जाता है |
इस अवसर पर सहायक आचार्य हेमंत कुमार डामोर , विक्रम सिंह, आजाद कुमार मीणा, एवं धर्मेंद्र कुमार वर्मा आदि ने भी अपने विचार रखें। और उन्होंने बताया कि –
हनुमान जी, जिन्हें पवनपुत्र, अंजनीपुत्र और बजरंगबली के रूप में जाना जाता है, शिव के 11वें रुद्र अवतार हैं। माता अंजनी और केसरी के घर जन्मे, वे रामभक्त, असीम बलवान, बुद्धिमान और निस्वार्थ सेवा के प्रतीक हैं। अपनी असीम शक्ति, बुद्धि और निस्वार्थ राम भक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं। वे एक चिरंजीवी हैं, जिन्हें आठ सिद्धियों और नौ निधियों का ज्ञान प्राप्त है। हनुमान चालीसा के अनुसार, हनुमान जी को माता सीता से आठ सिद्धियाँ (अष्ट सिद्धि) और नौ निधियाँ (नव निधि) प्राप्त हैं, जो उन्हें अलौकिक शक्तियाँ प्रदान करती हैं। ये शक्तियाँ ज्ञान, योग और भक्ति का सर्वोच्च प्रतीक हैं। वे अष्ट सिद्धि और नव निधि के दाता माने जाते हैं।
हनुमान जी की अष्ट सिद्धियाँ (Eight Siddhis):
1. अणिमा (Anima): अपने शरीर को सूक्ष्म (अणु के समान) रूप में बदलने की क्षमता।
2. महिमा (Mahima): अपने शरीर को अत्यंत विशाल रूप में बदलने की शक्ति।
3. गरिमा (Garima): स्वयं के भार को जितना चाहे उतना भारी बना लेना।
4. लघिमा (Laghima): स्वयं के भार को भारहीन (अत्यंत हल्का) बना लेना।
5. प्राप्ति (Prapti): किसी भी वस्तु को इच्छाशक्ति से तुरंत प्राप्त कर लेना।
6. प्राकाम्य (Prakamya): किसी भी इच्छा को पूरा करने की शक्ति (जल, थल या आकाश में विचरण)।
7. ईशित्व (Ishitva): ईश्वरत्व की प्राप्ति, अर्थात पूर्ण स्वामित्व।
8. वशित्व (Vashitva): संपूर्ण संसार या किसी भी प्राणी को अपने वश में करने की शक्ति।
नौ निधियाँ (Nine Nidhis): पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, हनुमान जी के पास कुबेर की नौ दिव्य निधियाँ भी हैं:
• पद्म निधि, महापद्म निधि, शंख निधि, मकर निधि, कच्छप निधि, मुकुंद निधि, कुंद निधि, नील निधि, और खर्व निधि।
हनुमान जी ने इन शक्तियों का प्रयोग हमेशा धर्म की रक्षा और श्री राम की सेवा के लिए किया है।
हनुमान जयंती शक्ति, भक्ति और साहस का पवित्र पर्व है। यह त्योहार हमें सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश देता है।








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