



हायला गांव की पीड़ा बनी सवाल, आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं का इंतजार सड़क, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में आदिवासी ग्रामीणों का जीवन संघर्षपूर्ण
गोगुन्दा, (कांतिलाल मांडोत)!सायरा पंचायत समिति के विसमा पंचायत अंतर्गत आने वाला हायला गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से दूर अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। आजादी के इतने वर्षों बाद भी यहां के करीब तीस घरों में रहने वाले आदिवासी परिवार मूलभूत सुविधाओं से वंचित जीवन जीने को मजबूर हैं। गांव तक पहुंचने के लिए किसी पक्के मार्ग का अभाव है और करीब दो किलोमीटर तक ऊबड़खाबड़ पगडंडी रास्ते से गुजरना पड़ता है जो आम लोगों के लिए ही नहीं बल्कि बीमार और बुजुर्गों के लिए बेहद कठिन साबित होता है।
गांव तक जाने वाला यह रास्ता बड़े बड़े पत्थरों और भाटाकूट से भरा हुआ है जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जंगल क्षेत्र में स्थित इस गांव की स्थिति इतनी दयनीय है कि यहां तक कोई वाहन नहीं पहुंच पाता। बारिश के मौसम में हालात और भी विकट हो जाते हैं जब खाड़ी में पानी भर जाने से गांव का सम्पर्क पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे समय में ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से गुजरना पड़ता है ताकि वे पदराडा या चित्रवास जैसे नजदीकी स्थानों तक पहुंच सकें।
हायला गांव में पेयजल की समस्या भी गंभीर बनी हुई है। पूरे गांव में एक भी हैंडपंप नहीं है और एनीकट जैसी कोई व्यवस्था भी नहीं की गई है। खाड़ी में मौजूद एकमात्र कुएं पर ही ग्रामीणों की निर्भरता है लेकिन गर्मी के दिनों में यह कुआं भी सूख जाता है जिससे पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। यह समस्या केवल असुविधा तक सीमित नहीं है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है।
स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। गांव में कोई चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है और आपात स्थिति में मरीजों को पलंग पर लिटाकर खाड़ी पार कर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। यह स्थिति कई बार मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर सड़क और पुल का निर्माण हो जाए तो ऐसी समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल सकती है।
गांव के निवासी पप्पू गरासिया ने बताया कि पंचायत से कई बार सड़क, पेयजल और मिनी पुल निर्माण की मांग की गई है लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वहीं गणेश गरासिया का कहना है कि पेयजल की समस्या को लेकर कई बार पंचायत को अवगत कराया गया लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। बाबुभाई गरासिया ने मीडिया के माध्यम से प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द सड़क निर्माण कराया जाए ताकि गांव तक आवागमन सुगम हो सके।
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय राजनीतिक दल और नेता गांव में आकर बड़े बड़े वादे करते हैं और विकास के सपने दिखाते हैं लेकिन चुनाव खत्म होते ही कोई उनकी सुध लेने नहीं आता। इससे ग्रामीणों में निराशा और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। पार्टियों की राजनीति में उलझे इस गांव के लोगों की वास्तविक समस्याएं लगातार नजरअंदाज हो रही हैं।
केंद्र और राज्य सरकारें भले ही जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास के बड़े बड़े दावे कर रही हों लेकिन हायला गांव की स्थिति इन दावों की सच्चाई को उजागर करती है। सवाल यह उठता है कि जब सरकार का अभिगम जनतालक्षी है तो फिर इन गरीब आदिवासी परिवारों तक बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं पहुंच पा रही हैं। क्या प्रशासन की नजर इस गांव तक नहीं पहुंच रही या फिर यह क्षेत्र अब भी प्राथमिकता सूची में शामिल नहीं है।
हायला गांव के लोग अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी यह पीड़ा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचेगी और जल्द ही समाधान के प्रयास शुरू होंगे। ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की है कि गांव में सड़क निर्माण, पेयजल व्यवस्था और खाड़ी पर पुल का निर्माण किया जाए ताकि उनका जीवन थोड़ा आसान हो सके। यह केवल सुविधाओं की मांग नहीं है बल्कि एक सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार है जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इनका कहना है-
पंचायत गांव की समस्या दूर करने और मूलभूत सुविधाओं के लिए तत्पर है।ग्रामीणों द्वारा पंचायत को लिखित प्रपोजल मिल जाए, तो उस पर विस्तृत चर्चा की जा सकती है। हमे लिखित में भिजवाए-
भवानी शंकर जोशी
सचिव विसमा पंचायत सायरा








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